मिशन विरासत: प्रम्बानन का जीर्णोद्धार कर दुनिया को दिया संदेश, जानें पीएम मोदी ने अबतक कितनी धरोहरें सहेजीं?
इंडोनेशिया दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर में संरक्षण परियोजना की शुरुआत कर दोनों देशों के बीच के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती दी। यह पहल भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और सांस्कृतिक कूटनीति का अहम हिस्सा है।
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया। प्रधानमंत्री ने इस लगभग 1,000 वर्ष पुराने विश्व धरोहर मंदिर परिसर के संरक्षण परियोजना की शुरुआत की। वहीं, मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्मारक को भारत और इंडोनेशिया के बीच एक हजार वर्षों से भी अधिक पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का 'जीवंत और शानदार प्रमाण' बताया था। यह संरक्षण परियोजना दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कैसे अपनी सांस्कृतिक विरासत मजबूत कर रहा भारत?
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जीवन में लगातार अहम भूमिका निभा रही है। विभिन्न देशों में स्थित प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के माध्यम से भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर मजबूत कर रहा है।
वियतनाम से हुई शुरुआत
वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 'माई सोन सैंक्चुअरी' के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा कराया। यह दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे महत्वपूर्ण शैव मंदिर परिसरों में से एक तथा प्राचीन चंपा साम्राज्य का प्रमुख धार्मिक केंद्र रहा है।
श्रीलंका के प्राचीन शिव मंदिर को कैसे मिली नई पहचान?
वर्ष 2015 में भारत ने श्रीलंका के ऐतिहासिक तिरुकेथीश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में सहयोग दिया। भारत सरकार ने इस परियोजना के लिए 326 मिलियन श्रीलंकाई रुपये (LKR) की अनुदान सहायता उपलब्ध कराने संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित श्रीलंका के पांच प्राचीन 'पंच ईश्वरम' मंदिरों में से एक है।
म्यांमार के बागान में ऐतिहासिक धरोहरों को भारत ने कैसे संवारा?
वर्ष 2017 में भारत ने यूनेस्को सूचीबद्ध बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों के संरक्षण के लिए समझौता किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के माध्यम से 12 ऐतिहासिक पैगोडाओं का जीर्णोद्धार किया गया। इसके अलावा ऐतिहासिक आनंद मंदिर का पुनरुद्धार भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
नेपाल की सांस्कृतिक विरासत बचाने में भारत ने क्या भूमिका निभाई?
इसी वर्ष नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के लिए भारत ने 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की। इस सहायता के तहत 28 सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया गया, जिनमें ऐतिहासिक सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बुधानिलकंठ मंदिर धर्मशाला प्रमुख हैं।
बहरीन के श्रीनाथजी मंदिर का कायाकल्प कैसे हुआ?
वर्ष 2019 में बहरीन की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मनामा स्थित लगभग 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) मंदिर के 4.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया। इससे खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक का संरक्षण सुनिश्चित हुआ।
बांग्लादेश के मंदिरों के संरक्षण में भारत ने क्या योगदान दिया?
वर्ष 2020 में भारत सरकार ने बांग्लादेश के नटोर स्थित लगभग 300 वर्ष पुराने जॉय काली माता मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की। इसके अलावा आनंदमयी काली माता मंदिर और रामकृष्ण मंदिर के जीर्णोद्धार में भी सहयोग किया गया, जिससे वहां स्थित महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक स्थलों का संरक्षण संभव हुआ।
रमना काली मंदिर का पुनर्जन्म भारत की मदद से कैसे हुआ?
वर्ष 2021 में भारत ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान ध्वस्त हुए ऐतिहासिक रमना काली मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए सहायता की घोषणा की। उसी वर्ष मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा हुआ और इसका उद्घाटन किया गया। इससे बांग्लादेश में एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल फिर से स्थापित हुआ तथा दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक संबंध और मजबूत हुए।
कंबोडिया के अंगकोर परिसर के संरक्षण में भारत की भूमिका कितनी अहम रही?
वर्ष 2022 में भारत ने अंगकोर हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के प्रमुख हिस्सों—ता प्रोहम, अंगकोर वाट और प्रीह विहियर—के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया। इसके माध्यम से भारत ने अपने बाहर स्थित हिंदू सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक की स्थापत्य विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
लाओस के हजार साल पुराने वाट फौ मंदिर को भारत ने कैसे संवारा?
वर्ष 2024 में भारत ने यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल वाट फौ मंदिर की प्रमुख संरचनाओं का जीर्णोद्धार कराया। लगभग 1,000 वर्ष पुराने इस शिव मंदिर को दक्षिण-पूर्व एशिया में सनातन सभ्यता के सबसे प्राचीन जीवित प्रतीकों में से एक माना जाता है।
अब प्रम्बानन मंदिर में भारत का नया संरक्षण अभियान क्या है?
योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर में भारत सरकार के सहयोग से शुरू हो रही संरक्षण परियोजना साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) प्रम्बानन परिसर के भीतर स्थित कई छोटे मंदिरों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों के साथ मिलकर कार्य करेगा।
प्रम्बानन मंदिर की ऐतिहासिक विरासत इतनी खास क्यों मानी जाती है?
प्रम्बानन इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के निकट स्थित सबसे विशाल मंदिर परिसरों में से एक है। इसकी मूल संरचनाएं 9वीं शताब्दी ईस्वी में निर्मित हुई थीं। वर्ष 2006 के जावा भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और 11वीं शताब्दी के आरंभ में हुए राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के कारण इस परिसर को भारी क्षति पहुंची। हालांकि 17वीं शताब्दी में इसकी दोबारा खोज की गई।
240 मंदिरों वाला प्रम्बानन परिसर आखिर कितना भव्य है?
प्रम्बानन मंदिर परिसर शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित 240 मंदिरों का भव्य समूह है। इसे एक-दूसरे के भीतर बने तीन चौकोर प्रांगणों के रूप में विकसित किया गया है। पूरे परिसर में कुल 224 मंदिर स्थित हैं। सबसे भीतरी प्रांगण में 16 मंदिर हैं, जिनमें 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर सबसे प्रमुख है। इसके उत्तर में ब्रह्मा मंदिर और दक्षिण में विष्णु मंदिर स्थित हैं।
प्रम्बानन की पत्थर की नक्काशी में रामायण की कहानी कैसे जीवंत होती है?
यूनेस्को ने प्रम्बानन को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। संस्था के अनुसार, मंदिर की पत्थर की नक्काशी में रामायण महाकाव्य के इंडोनेशियाई संस्करण का अत्यंत सुंदर चित्रण मिलता है। यह मंदिर परिसर इंडोनेशिया और पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में शैव कला तथा शास्त्रीय स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
प्रम्बानन मंदिर का संरक्षण एक सदी से कैसे जारी है?
यूनेस्को के अनुसार, वर्ष 1918 से प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य लगातार जारी है। इसमें पारंपरिक पत्थर जोड़ने की तकनीकों के साथ आधुनिक कंक्रीट तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।
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रामायण बैले को प्रम्बानन का सबसे बड़ा आकर्षण क्यों माना जाता है?
वर्ष 1998 में प्रम्बानन को इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया गया। हर वर्ष मई से अक्टूबर के बीच पूर्णिमा की शाम मंदिर के दक्षिणी हिस्से में बने ओपन-एयर थिएटर में विश्वप्रसिद्ध रामायण बैले का मंचन किया जाता है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक पहुंचते हैं।