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TMC का चुनाव आयोग को जवाब: बागी गुट के दावों को बताया 'फर्जी'; कहा- 2027 तक वैध है पार्टी की संगठनात्मक समिति
Mon, 06 Jul 2026 07:48 PM IST
Pavan
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Mon, 06 Jul 2026 07:48 PM IST
सार
कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर बागी गुट यह कहता है कि 2025 के बाद पार्टी की समिति अस्तित्व में नहीं रही, तो फिर उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर किस आधार पर चुनाव लड़ा? उन्होंने कहा कि सभी बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के हस्ताक्षर वाले नामांकन पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था।
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कल्याण बनर्जी, सांसद, टीएमसी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रहे अंदरूनी विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग को अपना विस्तृत जवाब सौंप दिया। पार्टी ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) की सभी संगठनात्मक समितियां पार्टी संविधान के अनुसार 2027 तक वैध हैं। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग में जवाब जमा करने के बाद पत्रकारों से कहा कि पार्टी ने आयोग के सामने सभी तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर विस्तृत जवाब दाखिल किया है।
यह भी पढ़ें- बंगलूरू खदान हादसा: कर्नाटक सरकार को NHRC का नोटिस, कब तक देनी होगी रिपोर्ट? हादसे में सात मजदूर हुए थे हताहत
2022 में हुए थे संगठनात्मक चुनाव, 2027 तक रहेगा कार्यकाल
कल्याण बनर्जी ने कहा कि बागी गुट का यह दावा गलत है कि एआईटीसी समिति और राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया। उन्होंने बताया कि पार्टी के संविधान में पहले समिति का कार्यकाल तीन साल था, जिसे वर्ष 2000 में बढ़ाकर चार साल और 2006 में पांच साल कर दिया गया था। इन सभी संशोधनों की जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग को भी दी गई थी।
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उन्होंने कहा कि पार्टी के आखिरी संगठनात्मक चुनाव 2022 में हुए थे, इसलिए संविधान के अनुसार समिति का कार्यकाल पांच साल यानी 2027 तक रहेगा।
बागी नेताओं पर उठाए सवाल
कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर बागी गुट यह कहता है कि 2025 के बाद पार्टी की समिति अस्तित्व में नहीं रही, तो फिर उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर किस आधार पर चुनाव लड़ा? उन्होंने कहा कि सभी बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के हस्ताक्षर वाले नामांकन पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। अगर उनका दावा सही माना जाए तो उनका चुनाव लड़ना ही अवैध हो जाएगा। ऐसे में उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
22 जून की बैठक को बताया असंवैधानिक
टीएमसी ने बागी गुट की 22 जून को आयोजित विशेष बैठक को भी पार्टी संविधान के खिलाफ बताया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार संगठन का गठन ब्लॉक स्तर से शुरू होकर जिला और राज्य समिति के जरिए होता है, जिसके बाद अखिल भारतीय समिति का गठन किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी गुट ने इस पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न तो मीडिया में कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई, न सांसदों-विधायकों और पदेन सदस्यों को बैठक की सूचना दी गई। उनका कहना था कि इस तरह गठित समिति पार्टी संविधान के खिलाफ है और पूरी प्रक्रिया फर्जी है।
पार्टी कार्यालयों पर कब्जे का भी आरोप
टीएमसी ने आरोप लगाया कि बागी गुट राज्य प्रशासन की मदद से पार्टी कार्यालयों पर अवैध तरीके से कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई पार्टी संविधान और संगठनात्मक नियमों के विपरीत है।
यह भी पढ़ें- Manipur Ukhrul Unrest: असम राइफल्स के दो जवान बलिदान, मणिपुर के उखरुल में तनाव के बीच उग्रवादियों से झड़प
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, टीएमसी के भीतर संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर विवाद चल रहा है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पिछले सप्ताह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात कर दावा किया था कि वही वास्तविक ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों; ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी गुट; से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और पार्टी के संगठनात्मक चुनावों से जुड़े अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा था। अब ममता बनर्जी गुट ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए बागी गुट के सभी दावों को खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे का फैसला करेगा।
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2022 में हुए थे संगठनात्मक चुनाव, 2027 तक रहेगा कार्यकाल
कल्याण बनर्जी ने कहा कि बागी गुट का यह दावा गलत है कि एआईटीसी समिति और राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया। उन्होंने बताया कि पार्टी के संविधान में पहले समिति का कार्यकाल तीन साल था, जिसे वर्ष 2000 में बढ़ाकर चार साल और 2006 में पांच साल कर दिया गया था। इन सभी संशोधनों की जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग को भी दी गई थी।
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उन्होंने कहा कि पार्टी के आखिरी संगठनात्मक चुनाव 2022 में हुए थे, इसलिए संविधान के अनुसार समिति का कार्यकाल पांच साल यानी 2027 तक रहेगा।
बागी नेताओं पर उठाए सवाल
कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर बागी गुट यह कहता है कि 2025 के बाद पार्टी की समिति अस्तित्व में नहीं रही, तो फिर उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर किस आधार पर चुनाव लड़ा? उन्होंने कहा कि सभी बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के हस्ताक्षर वाले नामांकन पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। अगर उनका दावा सही माना जाए तो उनका चुनाव लड़ना ही अवैध हो जाएगा। ऐसे में उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
22 जून की बैठक को बताया असंवैधानिक
टीएमसी ने बागी गुट की 22 जून को आयोजित विशेष बैठक को भी पार्टी संविधान के खिलाफ बताया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार संगठन का गठन ब्लॉक स्तर से शुरू होकर जिला और राज्य समिति के जरिए होता है, जिसके बाद अखिल भारतीय समिति का गठन किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी गुट ने इस पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न तो मीडिया में कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई, न सांसदों-विधायकों और पदेन सदस्यों को बैठक की सूचना दी गई। उनका कहना था कि इस तरह गठित समिति पार्टी संविधान के खिलाफ है और पूरी प्रक्रिया फर्जी है।
पार्टी कार्यालयों पर कब्जे का भी आरोप
टीएमसी ने आरोप लगाया कि बागी गुट राज्य प्रशासन की मदद से पार्टी कार्यालयों पर अवैध तरीके से कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई पार्टी संविधान और संगठनात्मक नियमों के विपरीत है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, टीएमसी के भीतर संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर विवाद चल रहा है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पिछले सप्ताह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात कर दावा किया था कि वही वास्तविक ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों; ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी गुट; से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और पार्टी के संगठनात्मक चुनावों से जुड़े अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा था। अब ममता बनर्जी गुट ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए बागी गुट के सभी दावों को खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे का फैसला करेगा।