{"_id":"6a4ac61ae9c46979e4071f27","slug":"ttz-industrial-investment-worth-1-lakh-crore-stalled-due-to-restrictions-agra-news-c-25-1-agr1035-1101139-2026-07-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीटीजेड : रोक से अटका एक लाख करोड़ का औद्योगिक निवेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीटीजेड : रोक से अटका एक लाख करोड़ का औद्योगिक निवेश
विज्ञापन
एआई निर्मित तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाए गए ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में पाबंदियों के कारण औद्योगिक विकास का पहिया थम गया है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) और मथुरा रिफाइनरी के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट सहित एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर नहीं उतर पा रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के हजारों करोड़ के प्रस्ताव भी अटके हुए हैं। हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी की तैयारी पूरी कर ली है, जिसकी सुनवाई जुलाई में ही होने के आसार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2024 को टीटीजेड क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना, विस्तार और पेड़ों के कटान पर रोक लगाई थी। इसका सीधा असर आगरा और आसपास के जिलों के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ा है। 28 जून को आगरा दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उद्यमियों और जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद सीएम ने मंडलायुक्त को सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में मजबूत पैरवी के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने उद्यमियों के साथ बैठक कर अपना पक्ष तैयार कर लिया है। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अमित मिश्रा के मुताबिक, प्रशासन की तरफ से पैरवी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के बोर्ड ऑफ ट्रेड के सदस्य पूरन डावर का कहना है कि सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में इसी माह होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अगर बंदिशें हटती हैं, तो समूचे ब्रज क्षेत्र में औद्योगीकरण और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -
ये परियोजनाएं ठंडे बस्ते में
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर : लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित इस कॉरिडोर में यूपीडा को सशर्त अनुमति तो मिली लेकिन टीटीजेड की बंदिशों के कारण प्लॉट आवंटन और उद्योगों की स्थापना फंसी हुई है।
रिफाइनरी का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट : इंडियन ऑयल की मथुरा रिफाइनरी का विस्तार और देश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट (करीब 10,000 करोड़ का निवेश) चार साल से कोर्ट की अनुमति का इंतजार कर रहा है।
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर : लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 1,000 एकड़ में प्रस्तावित इस बड़ी परियोजना की जमीन पर खड़े पेड़ों को काटने की अनुमति न मिलने से यह कागजों तक सीमित है।
इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्ताव : ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए 335 एमओयू में से 221 धरातल पर नहीं आ सके। इससे 66,255 करोड़ रुपये का निवेश प्रभावित हुआ है।
पारंपरिक उद्योग और वानिकी: आगरा का फाउंड्री उद्योग, फिरोजाबाद का कांच उद्योग और भरतपुर सीमा के स्टोन क्रशर भी विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कृषि वानिकी से जुड़ी योजनाएं भी रुकी हुई हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2024 को टीटीजेड क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना, विस्तार और पेड़ों के कटान पर रोक लगाई थी। इसका सीधा असर आगरा और आसपास के जिलों के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ा है। 28 जून को आगरा दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उद्यमियों और जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद सीएम ने मंडलायुक्त को सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में मजबूत पैरवी के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने उद्यमियों के साथ बैठक कर अपना पक्ष तैयार कर लिया है। यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अमित मिश्रा के मुताबिक, प्रशासन की तरफ से पैरवी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
विज्ञापन
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के बोर्ड ऑफ ट्रेड के सदस्य पूरन डावर का कहना है कि सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में इसी माह होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अगर बंदिशें हटती हैं, तो समूचे ब्रज क्षेत्र में औद्योगीकरण और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
विज्ञापन
ये परियोजनाएं ठंडे बस्ते में
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर : लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित इस कॉरिडोर में यूपीडा को सशर्त अनुमति तो मिली लेकिन टीटीजेड की बंदिशों के कारण प्लॉट आवंटन और उद्योगों की स्थापना फंसी हुई है।
रिफाइनरी का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट : इंडियन ऑयल की मथुरा रिफाइनरी का विस्तार और देश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट (करीब 10,000 करोड़ का निवेश) चार साल से कोर्ट की अनुमति का इंतजार कर रहा है।
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर : लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 1,000 एकड़ में प्रस्तावित इस बड़ी परियोजना की जमीन पर खड़े पेड़ों को काटने की अनुमति न मिलने से यह कागजों तक सीमित है।
इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्ताव : ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए 335 एमओयू में से 221 धरातल पर नहीं आ सके। इससे 66,255 करोड़ रुपये का निवेश प्रभावित हुआ है।
पारंपरिक उद्योग और वानिकी: आगरा का फाउंड्री उद्योग, फिरोजाबाद का कांच उद्योग और भरतपुर सीमा के स्टोन क्रशर भी विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कृषि वानिकी से जुड़ी योजनाएं भी रुकी हुई हैं।