मुठभेड़ में मारे जा रहे जैश के आतंकियों से एम-4 कार्बाइन राइफल मिल रही है। इसे पाकिस्तान से आतंकियों के लिए भेजा जा रहा है। इसका कारण ये है कि आतंकियों को इस अमेरिकी हथियार को चलाने की अच्छी ट्रेनिंग हासिल है। ये उनका पसंदीदा हथियार है। यह बात डीजीपी दिलबाग सिंह ने कही।
अमेरिकी एम-4 राइफल बनी आतंकियों का पसंदीदा हथियार, जानिए इसमें ऐसा क्या है खास?
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कुलगाम में हुई मुठभेड़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले ऑपरेशन में मारे गए इमरान भाई नामक पाकिस्तानी जैश के आतंकी से दो हथियार बरामद हुए थे जिनमें से एक एम-4 राइफल थी। इससे आतंकी ज्यादा दूरी से वार कर सकते हैं, क्योंकि इसके ऊपर साइट लगी रहती है।
डीजीपी के अनुसार पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिये हीरानगर सेक्टर में चार दिन पहले ये हथियार भेजने की कोशिश की गई थी। ड्रोन को बीएसएफ के जवानों ने गिरा दिया था। हाल ही में कश्मीर रेंज के आईजीपी ने भी बताया था कि हीरानगर से भेजी जा रही एम-4 राइफल अली भाई नामक पाकिस्तानी जैश के आतंकी के लिए थी जो शोपियां में सक्रिय है।
डीजीपी ने कहा कि अभी तक सुरक्षाबलों से जितने भी हथियार बरामद किए हैं, इनमें ज्यादातर संख्या एम-4 राइफल की है। जितने आतंकी अभी जिंदा हैं उनके पास उतने ही हथियार हैं। पाकिस्तान की कोशिश है कि आईबी या एलओसी के रास्ते जैश और लश्कर के और आतंकी कश्मीर में भेजे जाएं।
आतंकियों से सरेंडर की अपील के बावजूद कामयाबी नहीं मिलने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि उन्हें लगता है कि जो हार्डकोर आतंकी हैं उनके दबाव के चलते दूसरे आतंकी सरेंडर करने से डरते हैं।