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Social Media Poetry: मैं मिट्टी से जुड़ा हुआ हूँ, तुम सोने के कारोबारी

वायरल काव्य
                
                                                         
                            मैं मिट्टी से जुड़ा हुआ हूँ
                                                                 
                            
तुम  सोने  के कारोबारी
बहुत दिनों तक नहीं निभेगी, मेरी और तुम्हारी यारी!

दुनिया कुछ भी कहे मगर तुम 
मुझको  बहुत  भले  लगते हो
पर  जाने  क्यों कुछ चुभता है
जब  भी  कभी  गले लगते हो

तुम जिस मठ के मठाधीश हो
मैं  हूँ   उसका   एक   पुजारी
बहुत दिनों तक नहीं निभेगी मेरी और तुम्हारी यारी!

कई  बार  विस्मित  करती  है 
नित्य   बदलती  भाषा   शैली 
उत्तरोत्तर       होती       जाती 
सम्बन्धों  की     चादर    मैली 

कितने  शीतयुद्ध  लड़ने हैं 
हम दोनों को  बारी - बारी 
बहुत दिनों तक नहीं निभेगी मेरी और तुम्हारी यारी! आगे पढ़ें

एक वर्ष पहले

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