पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   accused Nida granted bail in religious conversion case why Danish Shaikh fail to get relief from court

Nashik Conversion Case: धर्म परिवर्तन केस में आरोपी निदा को मिली बेल; दानिश को कोर्ट से क्यों नहीं मिली राहत?

Mon, 06 Jul 2026 10:39 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 06 Jul 2026 10:39 PM IST
सार

नासिक की एक अदालत ने TCS कर्मचारी निदा खान को कथित यौन उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में गिरफ्तारी के दो महीने बाद जमानत मिल गई। जबकि सह आरोपी दानिश शेख की जमानत याचिका गंभीर आरोपों और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका के चलते खारिज कर दी। मामले में तीसरे आरोपी तौसीफ अख्तर को भी जमानत मिली है।

विज्ञापन
accused Nida granted bail in religious conversion case why Danish Shaikh fail to get relief from court
निदा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित एक आईटी कंपनी की यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में सोमवार को अदालत ने TCS कर्मचारी निदा खान को गिरफ्तारी के दो महीने बाद जमानत दे दी। हालांकि, सह आरोपी दानिश शेख को कोई राहत नहीं मिली और अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन


दानिश शेख की जमानत याचिका क्यों हुई खारिज?
एडिशनल सेशंस जज (नासिक रोड कोर्ट) के.जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि दानिश शेख पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रकृति के प्रतीत होते हैं। जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, 'मामले में संभावित सजा की गंभीरता, सबूतों से छेड़छाड़, न्याय से फरार होने, गवाहों को धमकाने तथा उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।'हालांकि, निदा खान को जमानत देने संबंधी अदालत का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं हो सका है। मामले के तीसरे आरोपी तौसीफ अख्तर को भी सोमवार को जमानत मिल गई।
विज्ञापन


निदा खान की गिरफ्तारी कैसे हुई थी?
कई दिनों तक फरार रहने के बाद 7 मई को निदा खान को मध्य महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के नरेगांव इलाके में स्थित एक किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के संयुक्त अभियान के तहत की गई थी। नासिक स्थित आईटी कंपनी की यूनिट में कार्यरत जूनियर महिला कर्मचारियों की शिकायतों के बाद मामला सामने आया था। शिकायत दर्ज होने के बाद निदा खान करीब 25 दिनों तक फरार रही थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गर्भावस्था का हवाला देकर क्या दलील दी गई?
निदा खान की ओर से अधिवक्ता राहुल कलीवाल ने अदालत में दलील दी कि वह गर्भवती हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। इस पर सरकारी वकील विजय गायकवाड़ ने अधिवक्ता मिलिंद कुरकुटे और नितिन पंडित के साथ, जो पीड़िताओं में से एक की ओर से अदालत में पेश हुए थे, निदा खान और दानिश शेख दोनों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि जांच के दौरान यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं।

धर्म परिवर्तन के लिए क्या देने का आरोप है?
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दानिश शेख ने महिला पीड़िता को धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से एक इस्लामी पुस्तक और बुर्का दिया था। सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि पीड़िता का सुनियोजित तरीके से यौन शोषण किया गया और उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित तथा दबाव में लाने की कोशिश की गई।

आरोपियों पर कौन कौन सी धाराएं लगी हैं?
यह मामला देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (छलपूर्वक यौन संबंध बनाना), धारा 65 (यौन उत्पीड़न) और धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए आरोपियों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

एफआईआर में क्या क्या आरोप लगाए गए हैं?
एफआईआर के अनुसार, जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच दानिश शेख, तौसीफ अख्तर और निदा खान ने कथित रूप से हिंदू देवी देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कर शिकायतकर्ता की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। एफआईआर में यह भी आरोप है कि दानिश शेख ने शादी का झांसा देकर और झूठे वादे करके शिकायतकर्ता का विश्वास जीता तथा बाद में उसके साथ यौन संबंध बनाए। वहीं, तौसीफ अख्तर पर कार्यालय की लॉबी और पैंट्री में पीड़िता के साथ कथित रूप से गलत तरीके से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है।

जातिसूचक टिप्पणी और धर्म परिवर्तन का दबाव कैसे बनाया गया?
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि तीनों आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता का अपमान किया। शिकायत के अनुसार, निदा खान समेत अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर धमकियों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, उसका नाम बदलने की कथित साजिश भी रची गई, जिसके लिए दानिश शेख ने उसके जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि दानिश शेख और तौसीफ अख्तर ने कथित रूप से पीड़िता को मलेशिया में इमरान नामक व्यक्ति के पास भेजने की योजना बनाई थी।

एसआईटी किन मामलों की जांच कर रही है?
नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) TCS यूनिट में महिला कर्मचारियों के कथित यौन शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ मामलों की जांच कर रही है।


ये भी पढ़ें: मुंबई के बाद पुणे में गिरी बहुमंजिला इमारत, पांच उड़ानें डायवर्ट; बारिश से कितनी परेशानी?

TCS ने इस मामले पर क्या कार्रवाई की?
मामले के सामने आने के बाद TCS ने स्पष्ट किया कि कंपनी लंबे समय से किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और जबरदस्ती के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम करती है। कंपनी ने यह भी बताया कि नासिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न के आरोपों में कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed