PM Kisan Yojana: 23वीं किस्त के बीच किसानों को तोहफा, 17 लाख टन यूरिया आयात करेगी सरकार; नहीं होगी खाद की दिक्कत?
Urea availability Kharif 2026: सरकार ने खरीफ सीजन के बीच किसानों को आश्वस्त किया है कि देश में यूरिया और अन्य उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। घरेलू आपूर् ...और पढ़ें

किसानों को बड़ी राहत: सरकार करेगी 17 लाख टन यूरिया का आयात, खाद की कमी नहीं होगी
HighLights
देश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
17 लाख टन यूरिया आयात की प्रक्रिया अंतिम चरण में।
खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी नहीं होगी।
नई दिल्ली| पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त (PM Kisan 23rd installment) का ऐलान होने के बाद किसानों के लिए एक और बड़ी खबर सामने आई है। खरीफ सीजन के बीच सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल यूरिया और अन्य उर्वरकों की कोई बड़ी कमी नहीं है। इतना ही नहीं, घरेलू आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए 17 लाख टन यूरिया के आयात की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच गई है।
देशभर में चल रही खरीफ फसलों की बुवाई
सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से चल रही है और किसानों को खाद की जरूरत बढ़ रही है। उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयशी ने बताया कि देश में उर्वरकों का कुल स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है और मौजूदा समय में उपलब्धता को लेकर कोई गंभीर चुनौती नहीं दिख रही है।
यूरिया के स्टॉक पर क्या बोली सरकार?
कृषि मंत्रालय ने खरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरकों की कुल जरूरत 383.9 लाख टन आंकी है। इसके मुकाबले वर्तमान में 196.65 लाख टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है, जो सामान्य स्तर से करीब 33 प्रतिशत ज्यादा बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह बेहतर योजना, पहले से स्टॉक तैयार रखने और मजबूत लॉजिस्टिक प्रबंधन का नतीजा है।
आंकड़ों के मुताबिक, किसान अब तक 102.78 लाख टन रासायनिक उर्वरकों की खरीद कर चुके हैं। यह पूरे सीजन की अनुमानित जरूरत का लगभग 37 प्रतिशत है। वहीं सरकार ने संकट की आशंकाओं को देखते हुए 50 लाख टन से ज्यादा यूरिया और पीएंडके (फॉस्फेटिक एवं पोटासिक) उर्वरकों की व्यवस्था भी कर ली है।
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सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFC) द्वारा 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए जारी निविदा को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इस निविदा के लिए वैश्विक कंपनियों से 60 लाख टन से अधिक यूरिया की बोलियां मिली हैं। सबसे कम बोली करीब 445 डॉलर प्रति टन की बताई गई है।
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किसानों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आयात प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है तो खरीफ सीजन में यूरिया की उपलब्धता बनी रहेगी और किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि, इस फैसले से यूरिया की कीमतों में सीधे किसी राहत की घोषणा नहीं हुई है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई प्रभावित नहीं होगी और किसानों को समय पर उर्वरक मिल सकेंगे।
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