पुरानी कार खरीदते समय भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, इंजन के साथ जरूर चेक करें ये डिजिटल फीचर्स
Second Hand Car: अगर आप साल 2026 में पुरानी या फिर सेकंड हैंड कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सिर्फ माइलेज और इंजन की आवाज सुनना ही काफी नहीं है, ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में तकनीक काफी तेजी से बदल रही है। साल 2026 में जब आप कोई पुरानी या सेकंड हैंड कार खरीदने जाते हैं तो पुराना तरीका काम नहीं आता। पहले लोग सिर्फ कार का माइलेज, डेंट-पेंट, टायर और इंजन की आवाज देखकर सौदा पक्का कर लेते थे। लेकिन आज की आधुनिक कारें पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर जैसी है। इसलिए, पुरावी कार खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें।
सॉफटवेयर और अपडेट्स
आजकल की कारों में इंफोटेनमेंट सिस्टम, GPS नेविगशन और कई सारे सुरक्षा फीचर्स पूरी तरह सॉफ्टवेयर पर चलते हैं। कार खरीदने से पहले यह जरूर देखें कि क्या कार का सॉफ्टवेयर अप-टू-डेट है। अगर कार का सॉफ्टवेयर बहुत पुराना है तो कई नए फीचर्स ठीक से काम नहीं करेंगे। मालिकों पूछें की कार में OTA अपडेट की सुविधा है।
स्क्रीन और सेंसर्स का टेस्ट
सॉफ्टवेयर से ही कार का मुख्य टचस्क्रीन डिस्प्ले और ड्राइवर का डिजिटल मीटर जुड़ा होता है। टेस्ट ड्राइव के दौरान स्क्रीन को चलाकर देखें कि कहीं वह हैंग या लैग तो नहीं कर रहा। इसके अलावा, कार के पार्किंग सेंसर्स, 360-डिग्री कैमरा और क्रूज कंट्रोल जैसे फीचर्स को चालू करके देख लें। अगर कोई भी सेंसर खराब हैं तो उसे ठीक कराने में लंबा और महंगा खर्च आ सकता है।
बैटरी हेल्थ
अगर आप कोई पुरानी इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड कार खरीद रहे हैं तो सॉफ्टवेयर की भूमिका और भी बढ़ जाती है। कार के सॉफ्टवेयर के जरिए ही बैटरी की हेल्थ का पता चलता है। डिजिटल डैशबोर्ड पर चेक करें कि बैटरी की क्षमता कितनी बची है। बैटरी बदलने का खर्च बहुत ज्यादा होता है इसलिए बिना डिजिटल रिपोर्ट के EV का सौदा न करें।
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ध्यान रखें ये बातें
इसके अलावा- कार की समय पर सर्विस हुई है या नहीं इसकी सर्विस बुकलेट या कंपनी के ऐप पर जरूर चेक करें, इंजन से कोई अजीब आवाज तो नहीं आ रही और गियर आसानी से बदल रहे हैं या नहीं इसका ध्यान रखें, RC, इंश्योरेंस, PUC और कोई पेंडिंग चालान तो नहीं है यह भी जरूर चेक करें।
खरीदने से पहले कार को किसी अच्छे सर्विस सेंटर पर ले जाएं और स्कैनर लगवाकर डिजिटल हेल्थ रिपोर्ट निकालें। इससे छिपे हुए सॉफ्टवेयर डिफेक्ट्स तुरंत सामने आ जाएंगे।
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