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    खामेनेई की मौत से अमेरिकी सैनिकों की तैनाती तक... ईरान-इजरायल युद्ध में अब तक क्या हुआ?

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 08:36 PM (IST)

    मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को एक महीना पूरा हो गया है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत ...और पढ़ें

    ईरान -इजरायल-अमेरिका युद्ध के 30 दिन

    ईरान -इजरायल-अमेरिका युद्ध के 30 दिन

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    गरिमा सिंह, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को 1 महिना पूरा हो गया है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमले से इस युद्ध का आगाज हुआ था। इस हमले में पहले ही दिन ईरानी सुप्रीम लीडर समेत कई शीर्ष अधिकारी मारे गए, तभी से ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी है।

    जंग की आग एक महीने पूरे होने के बाद भी उतनी ही तेजी के साथ धधक रही है। एक ओर जहां अमेरिका-इजरायल संग मिलकर ईरान पर हमला कर रहा है वहीं ईरान भी खाड़ी देशो में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    हैरानी की बात ये है कि दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका बीते 30 दिनों से युद्ध में है, लेकिन वो ईरान को जीत नहीं पा रहा है। ईरान तमाम अमेरिकी दावे खारिज करते हुए इसी मांग पर अड़ा है कि सीजफायर उसके मन मुताबिक ही होगा। अब समझते हैं कि मिडिल ईस्ट में बीते 30 दिनों में क्या-क्या हुआ? 

    US Iran Nuclear Deal

    युद्ध की शुरुआत

    28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी/रोरिंग लायन' शुरू किया। इस ऑपरेशन में ईरान के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सीनियर लीडरशिप को निशाना बनाया गया। इस हमले में इरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत दर्जनों शीर्ष अधिकारी मारे गए।

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    युद्ध के पहले दिन दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में स्थित शजारेह तैय्येबे प्राइमरी स्कूल को भो निशाना बनाया गया। मिसाइलों के हमले में कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश सात से बारह साल लड़कियां थीं। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका ने स्कूल पर हमला किया।

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    हालांकि, अल जजीरा समेत कई मीडिया संगठनों और एमनेस्टी इंटरनेशनल और मानवाधिकार समूहों द्वारा की गई कई स्वतंत्र जांचों में सामने आया कि यह हमला जानबूझकर किया गया था और इस हमले में अमेरिका निर्मित टोमाहॉक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था।

    ट्रंप ने इसे पूरे हमले को' अमेरिका की रक्षा और खतरनाक ईरानी सरकार को खत्म करने' का अभियान बताया। इस हमले के बाद ईरान ने तुरंत पलटवार किया। 170 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन इजरायल के तेल अवीव, हाइफा और खाड़ी के अमेरिकी ठिकानों (यूएई, कतर, बहरीन) पर दागे गए। इजरायल में अलर्ट जारी हुआ, हजारों रिजर्व सैनिक बुलाए गए।

    खाड़ी और इजरायल पर ईरानी मिसाइलों की बौछार

    युद्ध के दूसरे दिन 1 मार्च को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर 72 से ज्यादा हमले किए। ईरान ने जवाब में बेत शेमेश, जेरूसलम और खाड़ी देशों पर हमले जारी रखे। इस बीच लेबनान में हिजबुल्ला एक्टिव मोड में आ गया। 2 मार्च को हिजबुल्ला ने 2024 के सीजफायर को तोड़ते हुए इजरायल के 'हाइफा' पर हमला किया। इसके जवाब में इजरायल ने बेरूत और दक्षिणी लेबनान में 70 से ज्यादा ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।

    4 मार्च तक हिजबुल्ला ने इजरायल के तेल अवीव और इजरायली तेल-गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। इजरायल ने 250 से ज्यादा हमले किए।  जिसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए। 5 मार्च को हिजबुल्ला ने 210 से ज्यादा मिसाइलें दागीं। इजरायल ने बेरूत के बुर्ज अल-बराजनेह इलाके और यूएन शांति बल मुख्यालय पर हमला किया, जिसमें घाना के 3 शांति सैनिक घायल हुए।

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    8 मार्च को इजरायल ने युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ईरान के तेल ठिकानों पर हमला करना शुरू किया , जिसमें कम से कम चार लोग मारे गए। पूर्वोत्तर तेहरान में स्थित अघदासीह तेल भंडार, दक्षिण में तेहरान तेल रिफाइनरी, पश्चिम में शाहरान तेल डिपो और कराज शहर में स्थित एक तेल डिपो मुख्या टारगेट थे। अल जजीरा के मुताबिक इस हमले के अगले दिन तेहरान के आसमान में 'काली बारिश' देखी

    'मयूरी नारी' पर हमला

    युद्ध के 12वें दिन 11 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई रजिस्टर्ड मालवाहक जहाज 'मयूरी नारी' पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज में भीषण आग लग गई। यह यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के खलीफा बंदरगाह से निकलकर भारत के गुजरात स्थित कंडला बंदरगाह की ओर जा रहा था। इस हमले में 20 क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि 3 लोग लापता थे

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    लारीजानी, खातिब और सुलेमानी की मौत

    युद्ध के 19वें दिन यानी 18 मार्च को बिना चेतावनी के हमले में ईरान के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर अली लारीजानी और रिवोल्यूशनरी गार्ड के बासिज फोर्स के प्रमुख जनरल गुलाम रजा सुलेमानी की मौत हो गई लारीजानी की हत्या देश की सत्ता व्यवस्था को बड़ा झटका थी।

    लारीजानी को ईरान की सुरक्षा नीति का अहम चेहरा माना जाता था वह शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबी थे। उनकी हत्या को ईरान के लिए बड़ा नुकसान माना गया। इसी दिन इजरायल ने ईरान के खुफिया मामलों के मंत्री इस्माइल खातिब को भी निशाना बनाया खातिब को वैश्विक स्तर पर एक खतरनाक रणनीतिकार माना जाता था

    Iran Intelligence Minister

    साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला

    युद्ध के 21वें दिन 20 मार्च को इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया। जिसके बाद से ईरान इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में ऊर्जा संयत्रों पर ढाबा बोलने लगा। इसका खामियाजा भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों को भुगतना पड़ा।

    फारस की खाड़ी में स्थित साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात प्राकृतिक गैस भंडार है, जो ईरान और कतर के बीच साझा है। करीब 9,700 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र न सिर्फ भौगोलिक दृष्टि से विशाल है, बल्कि ईरान की ऊर्जा व्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ भी है।

    यह गैस फील्ड अकेले ही ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत उपलब्ध कराता है। देश की बिजली आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादन और घरेलू गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर है।

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    24 मार्च को इजरायली सेना ने लिटानी नदी तक का इलाका अपने कब्जे में ले लिया। हिजबुल्ला ने जवाबी हमलों में इजरायली सैनिकों और नागरिकों को निशाना बनाया।

    27 मार्च को इजरायली वायु सेना ने कहा कि उसने आईआरजीसी से जुड़े दो ईरानी इस्पात कारखानों पर हमला किया। हालांकि, उसने इन कारखानों को आईआरजीसी से जोड़ने वाला कोई सबूत पेश नहीं किया।

    ईरान की फोर्स समाचार एजेंसी ने बताया कि इज़रायली हमलों में अहवाज के पास खुजेस्तान स्टील और इस्फहान में मोबाराकेह स्टील को निशाना बनाया गया।

    हूती-हिजबुल्ला का रोल

    ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर (बहरीन के बाप्को रिफाइनरी समेत) पर हमले जारी रखे। हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल के खिलाफ दूसरा सैन्य अभियान शुरू किया।

    खाड़ी के देशों (यूएई, कतर, बहरीन) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले लगातार होते रहे। इससे ग्लोबल तेल-गैस सप्लाई प्रभावित हुई।

    30 दिन में कितने बार बदले ट्रंप के बयान

    ट्रंप ने पूरे 30 दिनों में कई बार ट्रुथ सोशल पर बयान दिया कि वे यह युद्ध जीत चुके हैं। शुरुआत में उन्होंने कहा, 'यह युद्ध 4-5 हफ्ते चल सकता है… ईरानी लड़ने में कमजोर लेकिन बातचीत में चतुर हैं।'

    9 मार्च को उन्होंने दावा किया कि युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा। 20 मार्च को लिखा, 'हम अपने लक्ष्यों के बहुत करीब हैं, अब सैन्य अभियान कम करने पर विचार कर रहे हैं।'

    26 मार्च को ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले 10 दिन (6 अप्रैल तक) के लिए रोक दिए क्योंकि बातचीत अच्छी चल रही है। 27 मार्च को उन्होंने फिर कहा, 'यह युद्ध बहुत साहसी और ऐतिहासिक है… हमने ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह नष्ट कर दी।' ट्रंप ने NATO पर भी नाराजगी जताई।

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    भारत पर कितना असर?

    इस युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा झटका दिया। खाड़ी में तेल-गैस आपूर्ति बाधित होने से LPG और प्राकृतिक गैस का संकट गहरानी लगा। पेट्रोल-डीजल सप्लाई को लेकर आशंका बढ़ी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान, अमेरिका और इजरायल से बातचीत कर भारतीय टैंकरों को हॉर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकासी का रास्ता निकाला। भारत ने सभी पक्षों से तुरंत सीजफायर और डी-एस्केलेशन की अपील की।

    सीजफायर अभी भी दूर 

    ईरान का साफ कहना है कि सीजफायर तभी होगा जब लेबनान की लड़ाई पूरी तरह बंद होगी। 29 मार्च तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ।

    29 मार्च को अमेरिका ने खाड़ी में अपने 3500 से ज्यादा सैनिक तैनात कर दिए हैं। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है तो उसके सैनिकों को ताबूत में वापस भेजा जाएगा।

    30वें दिन की स्थिति

    29 मार्च 2026 को युद्ध अपने 30वें दिन भी शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और ईरान के जवाबी हमले दोनों मोर्चों पर चल रहे हैं। खाड़ी में तनाव चरम पर है। 30 मार्च को भी ईरान के इजरायल के हाइफन रिफाइनरी को निशाना बनाया। 

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