वीबी-जी राम जी योजना के तहत बंगाल को मिले ₹8500 करोड़, शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र को दिया धन्यवाद
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि बंगाल को 'वीबी-जी राम जी' योजना के तहत ₹8500 करोड़ और ग्राम सड़क योजना के लिए ₹2400 करोड़ मिले हैं। ...और पढ़ें

बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
HighLights
बंगाल को वीबी-जी राम जी योजना में ₹8500 करोड़ मिले
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जन कल्याण शिविर का शुभारंभ किया
शिविरों में 54 केंद्रीय-राज्य योजनाओं का लाभ मिलेगा
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि केंद्र ने राज्य को ‘वीबी जी-राम जी’ (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना के तहत 8,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
शुभेंदु ने कहा कि केंद्र ने ग्राम सड़क योजना के तहत 2,400 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी है और 1,000 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।
54 योजनाओं का उठा सकेंगे लाभ
मुख्यमंत्री ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम से राज्यव्यापी ‘जन कल्याण शिविर’ कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि 15 से 17 जून तक आयोजित होने वाले 1,100 ‘जन कल्याण शिविर’ के जरिए लोग केंद्रीय और राज्य सरकार की 54 योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा सरकार का यह पहला जनसंपर्क कार्यक्रम है। लोग सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच शिविरों में पहुंचकर विभिन्न कल्याण योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं और आवेदन जमा कर सकते हैं।
लाभार्थियों की पहचान जरूरी: CM
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याण योजनाओं का लाभ अवैध प्रवासियों तक नहीं पहुंचना चाहिए और उन्होंने ऐसे परिवारों को लाभ देने पर सवाल उठाया जो अपने बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में नहीं भेजते या जहां ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया जाता।
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लाभार्थी डेटाबेस में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शुभेंदु ने कहा कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे, न कि फर्जी खाताधारकों तक।
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उद्घाटन के पहले दिन कई स्थानों पर आवेदकों की लंबी कतारें देखी गईं। इन शिविरों में अन्नपूर्णा योजना, आयुष्मान भारत सहित 54 योजनाओं को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया ‘वीबी-जी राम जी’ योजना ने मनरेगा की जगह ली है और यह ग्रामीण परिवारों को सालाना 125 दिन के रोजगार की गारंटी देती है।