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    परिषदीय स्कूलों में अब पेंटिंग और हस्तशिल्प से साइंस पढ़ेंगे छात्र, शिक्षा विभाग ने शुरू की 'कला के संग विज्ञान' पहल

    Updated: Fri, 19 Jun 2026 02:35 PM (IST)

    गोंडा के परिषदीय विद्यालयों में 'कला के संग विज्ञान' पहल शुरू हुई है, जिससे लाख छात्र-छात्राओं को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान और अन्य विष ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड तस्वीर

    एआई जेनेरेटेड तस्वीर

    HighLights

    1. गोंडा में 'कला के संग विज्ञान' पहल की शुरुआत।

    2. रचनात्मक गतिविधियों से विज्ञान को सरल और रोचक बनाना।

    3. तीन लाख छात्रों को मिलेगा अनुभवात्मक शिक्षा का लाभ।

    संवाद सूत्र, गोंडा। गर्मी की छुट्टियाें के बाद अब परिषदीय विद्यालयों की कक्षाओं में केवल ब्लैकबोर्ड और किताबें ही नहीं दिखेंगी, बल्कि रंग-बिरंगी पेंटिंग, आकर्षक चार्ट, पेपर क्राफ्ट और विज्ञान के मॉडल बच्चों की सीखने की नई दुनिया तैयार करेंगे।

    बेसिक शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी पहल कला के संग विज्ञान के जरिए जिले के 2609 विद्यालयों में अध्ययनरत करीब तीन लाख छात्र-छात्राओं को पढ़ाई का नया और रोचक अनुभव मिलेगा। इस व्यवस्था के तहत विज्ञान सहित अन्य विषयों की जटिल अवधारणाओं को कला और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझाया जाएगा।

    बच्चे अब केवल किताबों के पन्नों में विज्ञान नहीं खोजेंगे, बल्कि अपने हाथों से मॉडल बनाकर, चित्र उकेरकर और प्रयोगात्मक गतिविधियों में भाग लेकर उसे महसूस भी करेंगे।

    कठिन विषय भी बच्चों को लगेंगे सरल

    विभागीय अधिकारी का मानना है कि जब सीखने की प्रक्रिया आनंददायक बनती है, तो बच्चों की विषयों के प्रति रुचि स्वतः बढ़ती है और उनकी समझ अधिक गहरी होती है। विद्यालयों में शिक्षक विभिन्न विषयों को पेंटिंग, चार्ट निर्माण, पोस्टर, हस्तशिल्प और अन्य रचनात्मक विधाओं से जोड़ेंगे। इससे बच्चों को कठिन विषय भी सरल और यादगार लगेंगे।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी अनुभवात्मक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है। इस पहल की एक खास बात यह भी है कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, लोककला और परंपरागत कलाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का माध्यम भी बनेगी।

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    छात्रों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी

    कक्षा में होने वाली रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथथ उनकी छिपी प्रतिभाओं को भी सामने लाएंगी। शिक्षकों का कहना है कि इससे कक्षाओं का वातावरण अधिक जीवंत और संवादात्मक बनेगा। बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम समझेंगे।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह का कहना है कि ऐसे नवाचार से छात्र-छात्राओं में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी। साथ ही सरल तरीके से कठिन विषयों और पाठ को जान सकेंगे।

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