एटा-कासगंज रेल परियोजना अगस्त से पकड़ेगी रफ्तार, 20 गांवों में जमीन होगी अधिग्रहीत; बनेंगे 3 नए रेलवे स्टेशन
दशकों से लंबित एटा-कासगंज रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य अगस्त से शुरू होने की उम्मीद है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
अगस्त से एटा-कासगंज रेल लाइन का निर्माण शुरू होगा।
29 किमी लंबी परियोजना पर 428 करोड़ रुपये की लागत।
बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जागरण संवाददाता, एटा। दशकों से लंबित एटा-कासगंज रेल लाइन परियोजना अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। जिला प्रशासन की ओर से इसी सप्ताह अंतिम 20-एफ गजट प्रकाशित किए जाने की तैयारी है। गजट प्रकाशित होते ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अगस्त माह से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
आजादी के बाद से एटा और कासगंज के लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग रही यह परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। रेल लाइन बनने के बाद एटा को कासगंज के माध्यम से बरेली, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर दिशा के रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। यात्रियों को लंबा चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा। रेल नेटवर्क के माध्यम से जिला पूरे देश से जुड़ जाएगा।
करीब 29 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन के निर्माण के लिए दोनों जिलों के 20 गांवों की लगभग 116 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को मुआवजे की राशि पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के तहत सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
रेल मार्ग एटा रेलवे स्टेशन से शुरू होकर नदरई के निकट मथुरा-कासगंज-बरेली रेलखंड से जुड़ेगा। इस मार्ग पर तीन नए रेलवे स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इनमें न्यौराई और अचलपुर स्टेशन एटा जिले में जबकि रसूलपुर गढ़ा स्टेशन कासगंज जिले में प्रस्तावित है।
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वर्ष 2025 में परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 428 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इसमें रेलवे ट्रैक, पुल, स्टेशन भवन, विद्युत व्यवस्था और अन्य आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना से बदल जाएगी क्षेत्र की तस्वीर
बरेली और उत्तराखंड तक सीधी कनेक्टिविटी
रेल लाइन बनने के बाद एटा के यात्रियों को कासगंज के रास्ते बरेली और उत्तराखंड की दिशा में बेहतर रेल सुविधा मिलेगी।
व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
रेल संपर्क मजबूत होने से कृषि उत्पादों और औद्योगिक सामान के परिवहन में सुविधा होगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
यात्रा समय में होगी कमी
वर्तमान में कई यात्रियों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ता है। नई रेल लाइन से समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर
निर्माण कार्य के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्टेशन विकसित होने के बाद भी स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
परियोजना एक नजर में
- 29 किलोमीटर रेल लाइन की लंबाई
- 428 करोड़ रुपये कुल लागत
- 116 हेक्टेयर अधिग्रहीत भूमि
- 20 प्रभावित गांव
- 03 नए रेलवे स्टेशन
एटा जिले के इन गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
एटा देहात, नगला फरीद, न्यौराई, हिम्मतनगर बझेड़ा, अचलपुर, मोहम्मदपुर, गोबरा, रसूलपुर गढ़ौली, नगला किसिया, रारपट्टी, बीरपुर, श्योराई, बुरहानाबाद, नगला श्याम, बढ़ौली और यादगारपुर।
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कासगंज जिले के इन गांव के जाएगी भूमि
बांकनेर, नसरतपुर, बरेला और कुरामई
इंतजार की पटरी पर दौड़ेगी उम्मीदों की रेल
एटा-कासगंज रेल लाइन परियोजना केवल एक रेलवे ट्रैक नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र के विकास का नया अध्याय मानी जा रही है। वर्षों से अधूरी पड़ी इस योजना में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद ने जिले के लोगों में नई आशा जगा दी है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होते ही अगस्त से मशीनों की आवाज सुनाई देने की उम्मीद है।
एटा-कासगंज रेल लाइन के लिए सारी प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट एटा-कासगंज जिला प्रशासन को दिया जा चुका है। इस बजट से किसानों को अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा दिया जाएगा।
पंकज कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर लखनऊ मंडल