एटा से आगरा तक 390 करोड़ से बनने वाला नया हाईवे अटका, टीटीजेड का फंसा पेंच; कोर्ट के आदेश पर टिकी मंजूरी
एटा से आगरा तक प्रस्तावित 390 करोड़ रुपये का हाईवे ताज ट्रिपोजियम जोन (टीटीजेड) के कारण अधर में लटका है, जिससे निर्माण कार्य रुका हुआ है। परियोजना का ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।
जागरण संवाददाता, एटा। जिला मुख्यालय से जलेसर होते हुए आगरा तक प्रस्तावित हाईवे का निर्माण कार्य लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। सड़क निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जगह-जगह गड्ढों से भरी सड़क पर सफर करना लोगों की मजबूरी बन गया है।
वहीं, इस महत्वपूर्ण परियोजना का भविष्य अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिका हुआ है, क्योंकि परियोजना का बड़ा हिस्सा ताज ट्रिपोजियम जोन (टीटीजेड) में होने के कारण कानूनी और पर्यावरणीय प्रक्रियाओं में उलझ गया है।
जनपद के लोगों को उम्मीद थी कि हाईवे बनने से एटा और आगरा के बीच यात्रा सुगम होगी। साथ ही क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन और विकास को गति मिलेगी। निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और दूसरे चरण की शुरुआत न होने से लोगों की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं। वर्तमान में सड़क की हालत खराब होने से वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई स्थानों पर गहरे गड्ढे दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण में एटा जिला मुख्यालय से नूंहखास तक लगभग 24 किलोमीटर सड़क का निर्माण 132 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस हिस्से में कार्य प्रगति पर है।
वहीं, दूसरे चरण में नूंहखास से आगरा तक लगभग 51 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण 390 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। यही हिस्सा ताज ट्रिपोजियम जोन के दायरे में आने के कारण अटका हुआ है।
पर्यावरणीय मानकों को करना होगा पूरा
टीटीजेड क्षेत्र में किसी भी बड़े निर्माण कार्य के लिए पर्यावरणीय मानकों और विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। इसी वजह से परियोजना से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं। जब तक न्यायालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश और आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिल जातीं, तब तक दूसरे चरण का निर्माण शुरू होना संभव नहीं माना जा रहा है।
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जलेसर-आगरा मार्ग का प्रस्तावित हिस्सा ताज ट्रिपोजियम जोन में आने के कारण मामला विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही निर्माण कार्य को गति दी जाए।
रवींद्र जायसवाल, अधिशासी अभियंता, एनएचएआई आगरा