भदोही में पांच वर्षीय बच्चे को जंगली जानवरों ने नोचकर मार डाला, परिजनों में पसरा मातम
भदोही के सुरियावां थाना क्षेत्र में जंगली जानवरों ने सोते हुए पांच वर्षीय बच्चे पिंटू बनवासी को नोचकर मार डाला। इस घटना से पूरे गांव में भय का माहौल ह ...और पढ़ें

भदोही में जंगली जानवरों का आतंक, पांच वर्षीय बच्चे की मौत से गांव में दहशत।
HighLights
पांच वर्षीय पिंटू बनवासी की जंगली जानवरों से मौत।
सुरियावां के बिसही गांव में रात में हुई घटना।
ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से कार्रवाई की मांग।
जागरण संवाददाता, भदोही। सुरियावां थाना क्षेत्र के बिसही (हरिहरपुर) में मंगलवार की रात सोते समय पट्टर वनवासी के पांच वर्षीय पुत्र पिंटू बनवासी की जंगली जानवरों के काटने से मृत्यु हो गई। औराई कोतवाली के उगापुर निवासी पट्टर वनवासी पिछले एक वर्ष से अपनी पत्नी और बच्चे के साथ बसही में अपने फूफा फूलचंद वनवासी के यहां निवास कर रहा था। मंगलवार की रात सभी परिवार के सदस्य घर के बाहर सो रहे थे। रात लगभग डेढ़ बजे पिंटू को जंगली जानवर उठाकर पास की झाड़ी में खींच ले गए और उसे नोचने लगे।
बालक की चीख-पुकार सुनकर पास में स्थित यादव परिवार के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दो जानवर बालक को नोच चुके थे और भाग निकले थे। पिंटू के सिर और शरीर के कई हिस्सों को गंभीर चोटें आई थीं। आनन-फानन में परिवार के लोग उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना की सूचना मिलने पर पीआरबी पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन किसी प्रशासनिक अधिकारी के न पहुंचने के कारण परिजनों ने बुधवार की सुबह शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इस घटना ने पूरे गांव में भय का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों में जंगली जानवरों के प्रति चिंता और डर व्याप्त हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगली जानवरों के आतंक से बचाने के लिए उचित सुरक्षा उपाय किए जाएं।
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इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। लोग अब रात में बाहर सोने से डर रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और जंगली जानवरों के हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जंगली जानवरों का खतरा अब केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मानव बस्तियों में भी घुसपैठ कर रहा है।