ओम प्रकाश राजभर के बयान पर बलिया के सपा सांसद सनातन पांडे का पलटवार, बोले- 'दायरे में रहकर करें बात'
सपा सांसद सनातन पांडे ने ओमप्रकाश राजभर के सपा में बड़ी टूट के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राजभर को अपनी सीमा में रहने की सलाह देते हुए ब ...और पढ़ें

ओमप्रकाश राजभर के बयान पर सपा सांसद सनातन पांडे का पलटवार: 'दायरे में रहकर करें बात'।
HighLights
सपा सांसद सनातन पांडे ने ओमप्रकाश राजभर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
राजभर को अपनी सीमा में रहकर बात करने की नसीहत दी।
बलिया के बागी इतिहास और संघर्ष की विरासत का किया जिक्र।
जागरण संवाददाता, बलिया। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर द्वारा समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने के संकेत दिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले में बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओमप्रकाश राजभर को अपने दायरे में रहकर ही बात करनी चाहिए।
सांसद सनातन पांडे ने कहा कि बलिया की पहचान हमेशा से बागी तेवर और संघर्ष की रही है। जब देश अंग्रेजों की गुलामी में था और युवा वर्ग खुलकर विरोध करने से हिचक रहा था, तब बलिया के वीर सपूत मंगल पांडे ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उन्होंने अंग्रेजों की नीतियों का विरोध करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी और स्वतंत्रता संग्राम की नींव मजबूत की।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी से पहले जिन तीन जनपदों ने स्वतंत्र होने का गौरव प्राप्त किया था, उनमें महाराष्ट्र का सतारा, उत्तर प्रदेश का बलिया और बंगाल का मेदिनीपुर शामिल था। इनमें भी बलिया की भूमिका अग्रणी रही थी। यही कारण है कि बलिया को आज भी बागी बलिया के नाम से जाना जाता है।
सांसद ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का उल्लेख करते हुए कहा कि बलिया की धरती ने ऐसे नेतृत्व को जन्म दिया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति को दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र, संविधान और देशहित की रक्षा के लिए संघर्ष की आवश्यकता पड़ी तो वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर वह नए मंगल पांडे की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार हैं।
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ओमप्रकाश राजभर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष की आवाज दबाने के लिए विभिन्न संस्थाओं और एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियां गरीबों, मजदूरों, शोषितों और वंचितों के हितों के खिलाफ हैं।
सपा में टूट और 20 से 25 सांसदों के समर्थन संबंधी चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि देश के गरीबों और वंचित वर्ग की आवाज उठाने वाला कोई सांसद भाजपा के दबाव में नहीं आएगा। साथ ही उन्होंने चुनौतीपूर्ण अंदाज में कहा कि यदि किसी को भाजपा के कृत्यों का विरोध करना है तो उसे अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए। अंत में उन्होंने ओमप्रकाश राजभर को संबोधित करते हुए कहा, "ओमप्रकाश राजभर जी अपने दायरे में रहें और दायरे में रहकर ही बात करें।"