बलिया में अब छह की जगह होंगी सात तहसीलें, प्रशासन ने तीन दिन में मांगा प्रस्ताव
बलिया में प्राचीन नगर पंचायत चितबड़ागांव को नई तहसील बनाने की मांग पर प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। अपर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी को तीन दिन में ...और पढ़ें
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बलिया में अब छह की जगह होंगी सात तहसीलें। AI जेनरेटेड फोटो
HighLights
चितबड़ागांव को नई तहसील बनाने की मांग पर कार्यवाही तेज।
प्रशासन ने तीन दिन में प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
फेफना क्षेत्र के लोगों को राजस्व कार्यों में मिलेगी सुविधा।
जागरण संवाददाता, बलिया। जनपद की प्राचीन नगर पंचायत चितबड़ागांव को तहसील बनाने की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर गति पकड़ती नजर आ रही है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अनिल कुमार ने उपजिलाधिकारी सदर को निर्देशित किया है कि शासन द्वारा निर्धारित मानकों एवं राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुरूप औचित्यपूर्ण एवं सुसंगत प्रस्ताव तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराया जाए।
इसको लेकर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 12 मई को, जबकि पूर्व मंत्री नारद राय ने 10 मई को शासन को पत्र भेजकर फेफना विधानसभा क्षेत्र स्थित नगर पंचायत चितबड़ागांव को नई तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वर्तमान में जनपद बलिया में बलिया सदर, रसड़ा, बांसडीह, बैरिया, सिकंदरपुर और बेल्थरारोड सहित छह तहसीलें संचालित हैं। फेफना विधानसभा क्षेत्र बलिया सदर तहसील के अंतर्गत आता है, जिसका क्षेत्रफल काफी बड़ा है। इसके कारण क्षेत्र के लोगों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए बलिया मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि फेफना विधानसभा के कोरंटाडीह-उजियार जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से बलिया मुख्यालय की दूरी लगभग 34 किलोमीटर है, जबकि चितबड़ागांव की दूरी लगभग 17 किलोमीटर पड़ती है। ऐसे में चितबड़ागांव को तहसील का दर्जा मिलने से लाखों लोगों को समय और धन दोनों की बचत होगी। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अवगत कराया था।
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चितबड़ागांव जनपद की सबसे पुरानी नगर पंचायतों में शामिल है। यह क्षेत्र लंबे समय से एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित है तथा यहां कृषि मंडी भी संचालित है। नगर पंचायत की आबादी लगभग 50 हजार बताई जाती है। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि मंडी परिसर में तहसील भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध है।
नई तहसील के गठन से जहां फेफना विधानसभा क्षेत्र के लोगों को राजस्व एवं प्रशासनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी, वहीं बलिया सदर तहसील पर बढ़ता कार्यभार भी कम होगा। क्षेत्रीय जनता लंबे समय से चितबड़ागांव को तहसील बनाए जाने की मांग करती रही है। अब प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव मांगे जाने के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग जल्द पूरी हो सकती है।
ऐसे गठित होती हैं नई तहसीलें
नई तहसील के गठन के लिए सबसे पहले स्थानीय मांग या जनप्रतिनिधियों का प्रस्ताव आता है। जिलाधिकारी और राजस्व विभाग क्षेत्रफल, जनसंख्या, दूरी, प्रशासनिक सुविधा, उपलब्ध भूमि आदि का परीक्षण करते हैं।
जिला प्रशासन प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजता है। प्रस्ताव का परीक्षण राजस्व परिषद और राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है। अंततः उत्तर प्रदेश सरकार (कैबिनेट/राजस्व विभाग) नई तहसील के गठन का निर्णय लेकर अधिसूचना जारी करती है।
शासन से निर्देश मिलने के बाद इसका प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। अंतिम निर्णय शासन का ही होगा। राजस्व परिषद उप्र, अनुभाग-9 के आयुक्त एवं सचिव की ओर से भी जिला प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। -मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी, बलिया।