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Ayodhya News: वैज्ञानिक रहे कृष्ण मोहन बने राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव
Mon, 06 Jul 2026 09:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 06 Jul 2026 09:50 PM IST
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कृष्ण मोहन, ट्रस्ट के महासचिव।
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बीच रविवार को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी और ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को सर्वसम्मति से ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव चुना गया। वह दिवंगत कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद रिक्त हुए ट्रस्टी पद पर हाल ही में शामिल किए गए थे। अब उन्हें ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कृष्ण मोहन वही हैं, जिन्होंने 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान यजमान के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसके अलावा राम दरबार और मंदिर परिसर के अन्य सात मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा में भी उन्होंने यजमान के रूप में सहभागिता की थी।
कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ। उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे। मूल रूप से हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर बाजार निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद करीब पांच वर्ष तक एटॉमिक एनर्जी विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ और महाराष्ट्र कैडर मिला। वर्ष 2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे जिम्मेदारियों का निर्वहन
- डॉक्टर कृष्ण मोहन ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन से उनका प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं रहा, लेकिन महाराष्ट्र में सेवा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2012 से उन्होंने संघ के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। वह हरदोई नगर संघ चालक, अवध प्रांत संघ चालक सहित कई महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं और वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघ चालक हैं। ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी मिलने पर कृष्ण मोहन ने इसे भगवान श्रीराम की कृपा बताया। उन्होंने कहा कि वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ ट्रस्ट की जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।
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कृष्ण मोहन वही हैं, जिन्होंने 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान यजमान के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसके अलावा राम दरबार और मंदिर परिसर के अन्य सात मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा में भी उन्होंने यजमान के रूप में सहभागिता की थी।
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कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ। उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे। मूल रूप से हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर बाजार निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद करीब पांच वर्ष तक एटॉमिक एनर्जी विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ और महाराष्ट्र कैडर मिला। वर्ष 2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे जिम्मेदारियों का निर्वहन
- डॉक्टर कृष्ण मोहन ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन से उनका प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं रहा, लेकिन महाराष्ट्र में सेवा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2012 से उन्होंने संघ के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। वह हरदोई नगर संघ चालक, अवध प्रांत संघ चालक सहित कई महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं और वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघ चालक हैं। ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी मिलने पर कृष्ण मोहन ने इसे भगवान श्रीराम की कृपा बताया। उन्होंने कहा कि वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ ट्रस्ट की जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।