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    MP Budget: 4.65 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है मप्र सरकार का बजट, राजस्व आय बढ़ाना बड़ी चुनौती

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 10:17 PM (IST)

    मध्य प्रदेश का बजट मार्च में पेश होगा, जो 2026-27 तक 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। जीएसटी के बाद सीमित कर क्षेत्रों और बढ़ते कर्ज के कारण र ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. मार्च में पेश होगा मप्र का 4.65 लाख करोड़ का बजट।

    2. जीएसटी के बाद राजस्व बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती।

    3. लाड़ली बहना, बिजली सब्सिडी पर बढ़ रहा भारी खर्च।

    डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश का बजट मार्च के प्रथम सप्ताह में प्रस्तुत होगा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद में औसत वार्षिक वृद्धि दर 10 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। इस आधार पर 2026-27 का वार्षिक बजट 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। कर्ज बढ़ते-बढ़ते बजट के आकार से अधिक हो चुका है। मूलधन और ब्याज अदायगी का बोझ और बढ़ेगा।

    ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती आमदनी बढ़ाने की है, क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के पास कर लगाने के क्षेत्र सीमित हो गए हैं। आवश्यकता बेहतर वित्तीय प्रबंधन की है। इसी वजह से पहली बार रोलिंग बजट तैयार किया जा रहा है। इसमें एक साथ तीन वर्ष की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन कराया जा रहा है, ताकि वित्तीय वर्ष 2028-29 तक की कार्य योजना अभी से तैयार की जा सके।

    राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ चार लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया था। इसका सबसे बड़ा आधार केंद्रीय करों में प्रदेश का हिस्सा 1,11,662 करोड़ और केंद्रीय सहायता अनुदान 48,661 करोड़ रुपये था। राज्य ने स्वयं के करों में सात प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,09,157 करोड़ मिलने का अनुमान लगाया, लेकिन इसमें वह पीछे हैं, क्योंकि जीएसटी का हिस्सा पूरा नहीं मिल पाएगा।

    वहीं, सहायता अनुदान भी अभी कम ही मिला है। ऐसे में, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आमदनी बढ़ाने की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी स्वयं निगरानी कर रहे हैं। प्रतिमाह राजस्व की स्थिति को लेकर समीक्षा की जा रही है, ताकि विभागीय अधिकारियों के ऊपर भी दबाव रहे है।

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    50 हजार करोड़ से अधिक लाड़ली बहना व बिजली अनुदान का खर्च

    प्रदेश सरकार के बजट पर वेतन-भत्ते और ब्याज अदायगी को छोड़कर देखा जाए तो लाड़ली बहना और बिजली बिल अनुदान सबसे बड़े खर्च हैं। लाड़ली बहना योजना का प्रति लाभार्थी व्यय एक हजार रुपये से प्रारंभ होकर डेढ़ हजार रुपये महीना पहुंच गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 18,669 करोड़ रुपये का बजट प्रविधान रखा गया है। यह आगामी बजट में 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचेगा।

    उधर, घरेलू, कृषि और उद्योग क्षेत्र के उपभोक्ताओं को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने पर सरकार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष अनुदान दे रही है। इसमें और वृद्धि संभव है। वहीं, अधोसंरचना विकास और जल जीवन मिशन के काम तेजी से चल रहे हैं। इनमें भी सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा व्यय हो रहा है।

    जल जीवन मिशन में तो स्थिति यह है कि केंद्र सरकार से सहायता नहीं मिलने के कारण राज्य पर आठ हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार गया है। सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण के क्षेत्र में लगातार व्यय बढ़ रहा है।

    आमदनी बढ़ाने की चुनौती

    राज्य सरकार पर सबसे बड़ी चुनौती आमदनी बढ़ाने की है। जीएसटी की नई दरें प्रभावी होने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्रीय करों के हिस्से में लगभग आठ हजार करोड़ रुपये इस वर्ष कम मिलेंगे। वहीं, राज्य के करों का संग्रहण भी अभी लक्ष्य से पीछे है।
    राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन की प्रथम छमाही रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व आधिक्य की जो स्थिति अभी तक बनी हुई है, वह बराबर या कम हो सकती है। हालांकि, सरकार ने इस पर फोकस किया है। आबकारी और खनिज क्षेत्र से आय बढ़ाने के विकल्पों पर काम चल रहा है तो निवेश को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है।

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    कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की कार्य योजना भी बनाई गई है ताकि किसानों की आमदनी बढ़े। पूंजीगत व्यय 90 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, इस निवेश से अधोसंरचना निर्माण के कार्य से जुड़े बाजार में तेजी आएगी और राजस्व बढ़ेगा।

    लगातार बढ़ रहा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान का व्यय

    वित्तीय वर्ष ---- व्यय
    2023-24 -- 97,141
    2024-25 -- 1,13,328
    2025-26 -- 1,28,340