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    लेह में प्रथम सिंधु कुंभ आज से, तिरंगे लेकर पहुंचे श्रद्धालु; देशभक्ति के नारों से गूंजा

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 07:00 AM (IST)

    लेह में प्रथम सिंधु कुंभ और 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा 22 जून से शुरू हो गई है, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। ...और पढ़ें

    लेह में प्रथम सिंधु कुंभ आज से। फोटो जागरण

    लेह में प्रथम सिंधु कुंभ आज से। फोटो जागरण


    HighLights

    1. लेह में प्रथम सिंधु कुंभ और 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा शुरू।

    2. हजारों श्रद्धालु देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रहे।

    3. डेमचौक मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा की मांग बुलंद।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में प्रथम सिंधु कुंभ में हिस्सा लेने के लिए देश, विदेश के सैकड़ों श्रद्धालु रविवार शाम को लेह पहुंचे गए। ये यात्री लेह में 22 जून से शुरू हो रही 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा में हिस्सा लेने के लिए तिरंगे लेकर पहुंचे। इस बार 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा को प्रथम सिंधु कुंभ के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

    रविवार शाम को प्रथम सिंधु कुंभ के लिए जम्मू से निकला 1200 श्रद्धालुओं का जत्था लेह पहुुंच गया। करीब इतने ही श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के मनाली की ओर से लेह पहुंचे हैं। सिंधु दर्शन यात्रा में हिस्सा लेने पहुंचे श्रद्धालुओं ने रविवार सुबह कारगिल में योग दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद लेह के लिए अपनी यात्रा शुरू की थी। शाम सात बजे के करीब यात्रियों के वाहन लेह पहुंचने लगे थे।

    चीन, पाकिस्तान जैसे देशों के साथ सीमाएं साझा करने वाले लद्दाख में देशभक्ति का संदेश फैलाने के लिए विभिन्न प्रदेशों के 2800 के करीब श्रद्घालु लेह पहुंचे हैं। कुछ श्रद्धालु अपने साथ हल्दी घाटी की मिट्टी लेकर भी आए हैं।

    देश, विदेश के 400 के करीब श्रद्धालु विमान से लेह आए हैं। लेह में सिंधु दर्शन यात्रा 27 जून तक चलेगी। इस दौरान लेह के सिंधु घाट से एक कदम कैलाश की ओर कार्यक्रम से डेमचौक के रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने की मांग बुलंद की जाएगी। श्रद्धालु छह किलोमीटर की यात्रा कर यह मांग उठाएंगे विदेश मंत्रालय, लद्दाख के मार्ग से कैलाश यात्रा शुरू करने का मुद्दा चीन से उठाए।

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    लद्दाख में सिंधु नदी के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने के लिए पूर्व उप प्रधानमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने वर्ष 1997 में सिंधु दर्शन यात्रा शुरू की थी। उनके साथ इस पहली यात्रा में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थी आए थे। इसके बाद से लगातार लद्दाख में सिंधु दर्शन यात्रा का आयोजन हो रहा है।

    यात्रा के संयोजक नरेंद्र अग्रवाल ने दैनिक जागरण को बताया कि देश के विभिन्न हिस्साें से श्रद्धालु लेह पहुंच गए हैं। कुछ श्रद्धालु सड़क मार्ग व विमान से 22 जून को भी लेह पहुंच रहेंगे। अगले पांच दिन तक लेह में सिंधु दर्शन यात्रा के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद श्रद्धालुओं की वापसी 27 जून से होगी। उन्होंनें बताया कि यात्रा के माध्सम से देश की एकता, अखंडता व सांस्कृतिक विरासत का संदेश दिया जाएगा।

    इसी बीच सोमवार को सिंधु दर्शन यात्रा के पहले दिन लेह के सिंधु भवन में लद्दाख के विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा। वहीं 23 जून को लेह के सिंधु घाट में तिरंगा फहराने के साथ पूजन होगा। सिंधु घाट पर 24 जून को स्नान व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 25 जून को पूर्वी लद्दाख की पैंगांग झील व 26 जून का खारदूंगला टाप की सैर होगा। वहीं 26 जून की सुबह लेह में कैलाश की ओर मार्च का आयोजन भी होगा।

    लद्दाख प्रशासन ने सिंधु दर्शन यात्रा को कामयाब बनाने के लिए पूरी तैयारी की है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना लेह में सिंधु दर्शन यात्रा की तैयारियों की स्वयं निगरानी कर रहे हैं। शनिवार काे भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी सिंधु घाट का दौरा किया था।