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जब मच्छरों के काटने से महात्मा गांधी को हो गया था मलेरिया, करने लगे थे ऐसी जिद

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Wed, 02 Jan 2019 05:49 PM IST
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Mahatma Gandhi had become malaria from mosquito bites
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मच्छर, शायद ही इससे कोई बच पाया हो। ऐसा माना जाता है कि सिकंदर महान की मौत भी मच्छर के काटने से हुई थी। महात्मा गांधी को भी तीन बार मलेरिया हुआ था। वे कई दिन तक बिस्तर पर रहे। इसी दौरान वे एक जिद्द भी कर बैठे, बोले मैं दवा नहीं लूंगा। प्राकृतिक तरीके से जो इलाज होता है, उसी से ठीक होकर दिखाऊंगा। खैर, महात्मा गांधी की मच्छरों के सामने एक न चली। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक, अंत में गांधी जी को 'कुनेन' लेनी पड़ी। वे दवा लेने के विरोध में थे। दूसरे तरीकों से खुद को ठीक करने में उनकी ज्यादा रुचि थी।



आईसीएमआर में बुधवार को मलेरिया पर पेश की गई एक रिपोर्ट के दौरान यह बात सामने आई है। आईसीएमआर के रिसर्च मेनेजमेंट, पॉलिसी, प्लानिंग और को-ऑर्डिनेशन के हेड डॉ. रजनीकांत का कहना है कि मलेरिया को जड़ से खत्म करने के लिए भारत ने 2030 तक लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे पूरा करने की दिशा में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। महात्मा गांधी को भी मलेरिया हुआ था। एक बार नहीं, बल्कि तीन दफा मच्छरों के काटने से वे बीमार पड़ गए थे। उनसे कहा गया कि वे दवा ले लें। गांधी जी ने दवा लेने से इन्कार कर दिया। उनका तर्क था कि मलेरिया जैसी बीमारी का इलाज प्राकृतिक तरीके से होना चाहिए।
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जैसे आप जहां रहते हैं, उसके आसपास साफ-सफाई रखें। मच्छर पैदा ही न हों, कोई ऐसा उपाय करें। अगर कुछ समय तक यह संभव नहीं है तो कम से कम इतना किया जाए कि मच्छर लोगों को काट न सके। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कई तरह की पहल की जा सकती हैं। डॉ. रजनीकांत ने बताया कि गांधी जी को उस वक्त इलाज के लिए कुनेन लेनी पड़ी। तीनों बार गांधी जी का खून टेस्ट किया गया था, जिसमें मलेरिया की पहचान हुई थी।
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मलेरिया का टीका, इसकी सफलता का रेट अभी 30-40 फीसदी है

आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. अनूप अनविकार का कहना है कि देश-विदेश में मलेरिया का इलाज करने के लिए बहुत से डॉक्टर-वैज्ञानिक 'टीके' की खोज में लगे हैं। फ़िलहाल जो नतीजे सामने आ रहे हैं, वे बहुत उत्साहवर्धक नहीं हैं। उनका सफलता रेट 30-40 फीसदी है। अभी दवा और मच्छरों से बचाव, इन दो तरीकों से ही मलेरिया का इलाज संभव है। एडीशनल डायरेक्टर डॉ. नीरज धींगडा ने कहा, भारत में मच्छरों से बचाव के लिए चार करोड़ इन्सेक्टिसाइड मच्छरदानी वितरित की गई हैं। 2014 में मलेरिया के चलते 562 लोगों की मौत हो गई थी। 2017 में यह आंकडा 194 रहा है। गत वर्ष यह संख्या और भी कम हो गई है।

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