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    हरियाणा में बदल गए नियम, अब जमीन की अदला-बदली के लिए लेनी पड़ेगी सरकार से मंजूरी; बिना NOC नहीं होगी रजिस्ट्री

    By Sudhir TanwarEdited By: Prince Sharma
    Updated: Sat, 20 Jun 2026 03:58 PM (IST)

    हरियाणा में शहरों से सटे क्षेत्रों में जमीन की अदला-बदली के लिए अब सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। यह कदम अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने और सस्ती ज ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. शहरों से सटे क्षेत्रों में जमीन अदला-बदली को मंजूरी अनिवार्य।

    2. अवैध कॉलोनियों और जमीन फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा।

    3. एक एकड़ से कम भूमि पर भी अनुमति आवश्यक।

    सुधीर तंवर, चंडीगढ़। शहरों और पालिकाओं के साथ लगते क्षेत्रों में जमीन की अदला-बदली के लिए अनिवार्य रूप से सरकार से मंजूरी लेनी पड़ेगी। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026 को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

    बजट सत्र में विधानसभा में विधेयक के पारित होने के बावजूद अभी तक राज्यपाल की सहमति नहीं मिलने के कारण अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है। इस कारण वित्तायुक्त राजस्व और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इस संबंध में नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया था।

    हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (संशोधन) अधिनियम के तहत शहरों से लगते अधिसूचित क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने और सस्ती जमीन देकर महंगी जमीन लेने का फर्जीवाड़ा खत्म करने के लिए धारा 7-ए में संशोधन किया गया है।

    इसके अनुसार एक एकड़ से कम भूमि को बदलने के लिए भी नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशक या सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी। हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा-7 में यह प्रविधान है कि किसी भी अधिसूचित शहरी क्षेत्र में, जो इस उद्देश्य के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया हो, एक एकड़ से कम क्षेत्रफल की किसी भी रिक्त भूमि का विक्रय, पट्टा या उपहार के रूप में अंतरण करने हेतु पंजीकरण से पूर्व नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशक अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

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    इसलिए पड़ी अध्यादेश लाने की जरूरत

    जमीन की रजिस्ट्रियों के दौरान पंजीकरण अधिकारियों ने पाया कि कई जगह छोटे भूखंडों की अदला-बदली करके अधिसूचित शहरी क्षेत्रों में स्थित कहीं बड़े या अधिक मूल्यवान भूखंड लिए जा रहे थे।

    हालांकि ऐसे लेन-देन कानूनी रूप से एक्सचेंज कहलाते हैं, परंतु वास्तव में ये अप्रत्यक्ष विक्रय लेन-देन होते हैं, जिसमें अधिनियम की धारा-7क के विनियामक प्रविधानों को दरकिनार किया जा रहा है।

    इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए 1975 के अधिनियम संख्या-8 की धारा-7क में संशोधन कर अदला-बदली विनियमन विलेख को भी उक्त प्रविधान के अंतर्गत लाया गया ताकि अवैध कालोनियों में ऐसे भूखंडों की खरीद-फरोख्त को हतोत्साहित किया जा सके।