फिजुलखर्चीः पीयू में ठेकेदारी प्रथा को फिर से मंजूरी, लुटाए जाएंगे दो करोड़ रुपये
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पीयू में ठेकेदारी प्रथा को फिर से मंजूरी दे दी गई है। इस पर हर साल दो करोड़ रुपये लुटाए जाएंगे। वीसी प्रो. राजकुमार ने 31 अक्तूबर को खत्म हुए एमटीएस कंपनी के करार पर मुहर लगा दी है। कंपनी के पहले से तैनात 100 से अधिक कर्मचारी काम जारी रखेंगे। जानकारों का कहना है कि कंपनी को लाभ पहुंचाने व अफसरों के चहेते कर्मचारियों को नौकरी देने के लिए फिर से यह प्लान पास किया गया है जबकि इसकी जरूरत पीयू को नहीं हो रही है।
पहले से काम कर रहे डेली वेजेज कर्मचारी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और न ही उन्हें स्थाई किया जा रहा है। काम इससे उनमें रोष वह अब चांसलर को भी चिट्ठी लिखकर पीयू का खेल उजागर करने की तैयारी कर रहे हैं। पीयू को इस फिजूलखर्ची को रोककर यह रकम दूसरे कार्य में खर्च करनी चाहिए या फिर ठेकेदारी प्रथा को हटाते हुए खुद पीयू को कर्मचारी तैनात करने चाहिए।
पीयू में इस्टिेब्लिसमेंट ब्रांच है। इसका काम नियुक्तियां देखना है। प्रमोशन आदि के कार्य भी इसी के जिम्मे हैं। काफी संख्या में इसके पास स्टाफ भी है, बावजूद इसके पीयू ठेकेदारों से काम ले रहा है। कुछ वर्षों से पीयू ठेकेदारी प्रथा के तहत कर्मचारी ले रहा है। एमटीएस कंपनी को लगातार काम मिल रहा है।
इस कंपनी के 100 से अधिक कर्मचारी विभिन्न विभागों में लगाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि डिस्पैच जैसे काम के लिए दो-दो कर्मचारी रखे गए हैं। कई ऐसे काम भी हैं जो सिंगल व्यक्ति कर सकता है, लेकिन वहां भी संख्या इसी तरह रखी गई है। बताया जाता है कि यह कर्मचारी खपाए जा रहे हैं।
कुछ अफसर कंपनी को पालपोस रहे हैं तो कुछ अफसरों के कर्मचारी ठेकेदारी प्रथा से काम में लगे हैं। पिछले दिनों कुछ विभागों ने तो यह भी कहा था कि उनके यहां कर्मचारियों की जरूरत नहीं है लेकिन वहां भी ठेकेदारी प्रथा से लिए गए कर्मचारी भेज दिए।
ऐसे मिल रहा है पैसा
एमटीएस कंपनी अपने कर्मचारियों को पीयू में तैनात कर रहा है। हर कर्मचारी को 13000 रुपये मानदेय दिए जा रहा है। यह रकम कर्मचारी को सीधे न मिलकर ठेकेदारी प्रथा के जरिये मिलती है। यह प्रक्रिया लंबी है। यदि पीयू सीधे अपने कर्मचारियों की भर्ती करे तो उसमें योग्य कर्मचारी मिलेंगे और जिम्मेदारी वह पूरी समझेंगे। ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत ठेकेदार को जिम्मेदार समझा जाता है लेकिन कार्रवाई उस पर नहीं होती है।
पहले से कंपनी को काम मिल रहा है। अब जरूरत फिर महसूस हुई होगी तो फिर काम दिया गया होगा। मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है, इसके बारे में पता किया जाएगा। - प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई
पीयू को योग्य कंपनी कोई नहीं मिल रही है, उसकी प्रक्रिया चल रही है, तब तक हमसे काम लिया जा रहा है। पीयू वीसी ने तीन माह के लिए डेली वेजेज कर्मचारी रखने के लिए फाइल मंजूर कर दी है। हमें खुद घाटा हो रहा है। - अनिल जैन, प्रोपराइटर, जैन एसोसिएट्स