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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले इनका खास ध्यान रखें

अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 17 Aug 2015 02:11 PM IST
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be aware about deductions during filing income tax return
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इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम तिथि (31 अगस्त) नजदीक आ रही है। अगर आपने अब तक आईटीआर फाइल नहीं की है तो इसे अंतिम तिथि से पहले अवश्य भर लें।



वहीं करदाताओं को आईटीआर फाइल करते समय कई बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। इनमें डिडक्शंस का खास तौर पर ख्याल रखें, ताकि सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट का फायदा उठा सकें।
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अक्सर करदाताओं को सेक्शन 80सी और 80डी के तहत मिलने वाली टैक्स डिडक्शन की जानकारी होती है, वहीं कुछ अन्य तरह की भी छूट होती हैं जिनका फायदा टैक्स चुकाने वालों को लेनी चाहिए।

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होम लोन प्रोसेसिंग फीस पर छूट

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होम लोन लेते समय इसकी प्रोसेसिंग फीस पर होने वाले खर्च को सेक्शन 24 के तहत आईटीआर भरते समय डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

टैक्स मामलों के एक्सपर्ट एडवोकेट हितेश पुरी ने बताया कि प्रोसेसिंग फीस और हाउस लोन से जुड़े अन्य तरह के खर्चों को ब्याज माना जाता है।

इन पर टैक्स फाइल करते समय डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। इसमें प्री-पेमेंट चार्जेज भी शामिल हैं। इसके अलावा मकान खरीदने, पुनर्निर्माण के लिए अगर आपने पर्सनल लोन लिया है, तो इसके इंटरेस्ट पर भी सेक्शन 24 के तहत आईटीआर फाइल करते समय डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

वहीं, पारिवारिक सदस्यों या दोस्तों से लिए गए कर्ज पर भी इस सेक्शन के तहत छूट का लाभ मिलता है। हालांकि इस बात का जरूर ध्यान रखें कि आपको कर्ज देने वाले को जो ब्याज मिलता है वह उसकी इनकम मानी जाती है और उससे इसका टैक्स वसूला जाता है।

बचत खाते पर, गंभीर बीमारियों पर

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सरकारी बैंकों के बचत खाते से 10 हजार रुपये तक के ब्याज पर सेक्शन 80 टीटीए के तहत टैक्स में छूट मिलनेे का प्रावधान है। डाक घर के बचत खाते से 3,500 रुपये तक के ब्याज पर भी सेक्शन 10(15)(आई) के तहत टैक्स नहीं लगता है। वहीं अगर आपका ज्वाइंट अकाउंट है तो यह राशि 7,000 रुपये तक हो सकती है।

गंभीर बीमारियों पर
टैक्सपेयर को सेक्शन 80डीडीबी में दर्ज कोई बीमारी है या इनमें से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति उस पर निर्भर हो तो 40 हजार रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। सीनियर सिटीजंस के मामले में यह डिडक्शन 60 हजार रुपये हो सकता है।

इसमें इस बात का जरूर ध्यान रखें कि अगर खर्च हुई रकम को कंपनी या बीमा कंपनी ने भुगतान कर दिया है, तो टैक्सपेयर्स डिडक्शन के लिए क्लेम नहीं कर सकता है। वहीं अगर भुगतान आधा या आंशिक हो तो शेष रकम के लिए डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

नुकसान को भी कर सकते हैं एडजस्ट
स्टॉक मार्केट या किसी तरह के इन्वेस्टमेंट में फाइनेंशिल ईयर में अगर आपको किसी तरह का नुकसान हुआ हो तो उसे आप स्टॉक्स, प्रॉपर्टी, गोल्ड या डेट फंड की बिक्री से होने वाले फायदे से एडजस्ट कर सकते हैं। शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स के अलावा टैक्सेबल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। एक्सपर्ट पुरी के अनुसार, हालांकि लंबी अवधि के कैपिटल नुकसान को टैक्सेबल कैपिटल गेन्स से ही एडजस्ट किया जा सकता है।

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