दाखिला प्रक्रिया: दिल्ली से बाहर भी होंगी डीयू की सभी प्रवेश परीक्षाएं
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दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2016-17 के अंतर्गत विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली सभी प्रवेश परीक्षाएं पहली बार दिल्ली से बाहर भी आयोजित होंगी। दाखिलों के लिए बनी स्टैंडिंग कमेटी ने पीजी, पीएचडी, एमफिल के बाद अब अन्य पाठ्यक्रमों के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा भी दिल्ली के अलावा छह अन्य शहरों में एक साथ कराने की सिफारिश दी है। 18 से 24 जून तक तीन शिफ्ट में ये प्रवेश परीक्षाएं होंगी। सभी प्रवेश परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रवेश परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग पर फिलहाल फैसला नहीं हुआ है।
डीयू में पीएचडी, एमफिल, यूजी, पीजी स्तर पर दाखिले के लिए देश भर से आवेदन आते हैं। ऐसे में आवेदकों को प्रवेश परीक्षा के लिए दिल्ली आना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें किसी भी स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षा के लिए दिल्ली नहीं आना पड़ेगा। पीजी, एमफिल, पीएचडी की प्रवेश परीक्षा दिल्ली से बाहर आयोजित करने के फैसले के बाद अब अन्य स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षा भी दिल्ली के साथ 6 अन्य शहरों वाराणसी, जम्मू, नागपुर, अहमदाबाद, चैन्नई व कोलकाता में भी आयोजित की जाएगी।
शुक्रवार को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सभी स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षाएं दिल्ली से बाहर भी कराने की सिफारिश की गई। हर प्रवेश परीक्षा की अवधि दो घंटे की होगी। कुलपति की मंजूरी मिलने पर ये सिफारिशें लागू हो जाएंगी। स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य प्रोफेसर आरएन दुबे ने बताया कि सभी प्रवेश परीक्षाओं के नतीजे 4 जुलाई तक जारी करने और 18 जुलाई तक सभी पाठ्यक्रमों के लिए दाखिला प्रक्रिया संपन्न करने की सिफारिश की गई है। यदि किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश परीक्षा के बाद साक्षात्कार होगा, तो उसका वेटेज 15 फीसदी से अधिक नहीं होगा।
इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला
एलएलबी, एलएलएम, बीएड, बीएलएड, बीटेक इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड मैथमेटिकल साइंस, बीए ऑनर्स ह्यूमनिटीज एंड सोशल साइंस, बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडी (बीएमएस), बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट एनालिसिस बीबीए (एफआईए) व बीए ऑनर्स बिजनेस इकोनॉमिक्स (बीबीई)।
प्रश्नों की संख्या तय करने का फैसला विभाग करेंगे
स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में यह सिफारिश दी गई है कि सभी प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी डीयू परीक्षा विभाग की होगी। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रश्नपत्र तैयार करेेंगे, जिसमें प्रश्नों की संख्या तय करने का फैसला विभागों पर छोड़ दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, साइंस स्तर की प्रवेश परीक्षा के लिए 45-60 व ह्यूमनिटीज स्तर के लिए 75-90 प्रश्नों की सिफारिश कमेटी ने की थी, लेकिन कुछ विभागों ने कहा कि विषय के आधार पर प्रश्नों की संख्या कम या ज्यादा होनी चाहिए। इसके बाद संख्या तय करने का फैसला विभागों पर छोड़ दिया गया।
एक समान अंक रखने व दुभाषी परीक्षा का सुझाव
बैठक में प्रो. आरएन दुबे की ओर से प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक समान अंक रखने का सुझाव दिया गया था। मसलन यदि कोई प्रवेश परीक्षा 100 अंकों की रखी जाए, तो अन्य प्रवेश परीक्षा भी 100 अंकों की हो। हालांकि इस पर यह तय हुआ कि इसे तय करने का फैसला विभागों पर छोड़ देना चाहिए। इसी तरह उन्होंने परीक्षाओं को दुभाषी आधार पर लिए जाने का सुझाव दिया, लेकिन यह सिफारिश दी गई कि जो परीक्षाएं जिस आधार पर होती हैं, वह वैसे ही होंगी।