सोना महंगा, सप्लाई कम और एक्सपोर्ट डाउन! जेम्स-ज्वैलरी सेक्टर के सामने खड़ा हुआ नया संकट; सस्ता होगा गोल्ड?
Gold News Today: सोने की सीमित उपलब्धता, ऊंची कीमतों और वैश्विक मांग में कमजोरी के कारण मई में भारत का जेम्स-ज्वैलरी निर्यात 2% घटकर 2.05 अरब डॉलर रहा ...और पढ़ें
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जेम्स-ज्वैलरी सेक्टर के सामने खड़ा हुआ नया संकट; सस्ता होगा गोल्ड?
HighLights
मई में जेम्स-ज्वैलरी निर्यात 2% घटकर $2.05 अरब डॉलर रहा।
सोने की सीमित उपलब्धता और बढ़ती कीमतें निर्यात गिरावट का मुख्य कारण।
आयात पर सख्ती से भारतीय जेम्स-ज्वैलरी सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई।
नई दिल्ली| सोने में भारी गिरावट के बीच जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर को मई महीने में बड़ा झटका लगा है। सोने की सीमित उपलब्धता, ऊंची कीमतों और वैश्विक मांग में कमजोरी के कारण देश का जेम्स-ज्वैलरी निर्यात सालाना आधार पर 2% घटकर 2.05 अरब डॉलर रह गया। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 2.10 अरब डॉलर था।
मई में कितना गिरा एक्सपोर्ट?
रुपए के हिसाब से देखें तो निर्यात में गिरावट और भी ज्यादा रही। मई में जेम्स-ज्वैलरी एक्सपोर्ट 9% घटकर 19,574 करोड़ रुपए पर आ गया, जबकि एक साल पहले यह 17,896 करोड़ रुपये था। उद्योग का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में उतार-चढ़ाव और सोने की उपलब्धता में कमी ने कारोबार को प्रभावित किया है।
जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि निर्यात में गिरावट की मुख्य वजह सोने के आयात में आई सख्ती है। इससे निर्यात के लिए ज्वैलरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सोने की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
21% तक गिर गई सोने की खपत
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-मई 2026 के दौरान निर्यात उत्पादन के लिए होने वाली गोल्ड खपत 21% घटकर 11 टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 14 टन थी। इसका सीधा असर ज्वैलरी निर्माण और निर्यात पर देखने को मिला।
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हालांकि, कट और पॉलिश्ड डायमंड्स से जुड़े कारोबार में कुछ राहत देखने को मिली। इस श्रेणी का निर्यात 3% बढ़कर 981 मिलियन डॉलर पहुंच गया। वहीं पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड्स का निर्यात 26% उछलकर 101 मिलियन डॉलर हो गया। इसके उलट गोल्ड ज्वैलरी निर्यात 15% गिरकर 758 मिलियन डॉलर पर आ गया।
चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में भी सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा है। अप्रैल-मई के दौरान कुल जेम्स-ज्वैलरी निर्यात 6% घटकर 4.27 अरब डॉलर रहा। रुपए के लिहाज से इसमें 4% की गिरावट दर्ज की गई और यह 40,399 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
उधर, जेम्स-ज्वैलरी आयात भी 13% घटकर 3.25 अरब डॉलर रह गया। इसमें सबसे बड़ी गिरावट साधारण गोल्ड ज्वैलरी आयात में देखने को मिली, जो 40% तक कम हो गया।
सीमित गोल्ड सप्लाई से बढ़ा दबाव
GJEPC ने चिंता जताई है कि बैंकिंग चैनलों के जरिए सोने की उपलब्धता पर नियामकीय अड़चनें बढ़ी हैं। इसके अलावा सोने की कीमतों में तेज उछाल और आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने से लागत काफी बढ़ गई है।
उद्योग संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत, सीमित गोल्ड सप्लाई और पुराने ड्यूटी ड्रॉबैक रेट्स के कारण निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता और मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है।
सेक्टर का मानना है कि यदि गोल्ड सप्लाई से जुड़ी बाधाएं जल्द दूर नहीं हुईं तो जेम्स और ज्वैलरी निर्यात पर आने वाले महीनों में भी दबाव बना रह सकता है।