ECLGS 5.0 से कंपनियों को बड़ी राहत! कैसे मिलेगा ₹100 करोड़ तक का अतिरिक्त फंड, आप कैसे उठा सकते हैं फायदा?
मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण कंपनियों की बढ़ती वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की ECLGS 5.0 योजना बड़ी राहत बनकर उभरी है। यह स्कीम ...और पढ़ें

ECLGS 5.0 से कंपनियों को बड़ी राहत मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी होंगी
HighLights
ECLGS 5.0 से कंपनियों को ₹100 करोड़ तक अतिरिक्त फंड।
MSME और गैर-MSME को 90-100% सरकारी गारंटी मिलेगी।
मिडिल ईस्ट युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों को विशेष लाभ।
नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट वॉर में जारी संघर्ष का असर अब दुनियाभर के कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। सप्लाई चेन में रुकावट, कच्चे तेल से जुड़े इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और व्यापार चक्र के लंबा होने से कंपनियों की वर्किंग कैपिटल जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे माहौल में केंद्र सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS 5.0) कंपनियों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है।
करीब 2.55 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान वाली यह योजना पिछले महीने से लागू हुई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) का मानना है कि यह स्कीम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ-साथ गैर-MSME कंपनियों की बढ़ी हुई वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मिल सकता है 20% का अतिरिक्त फंड
योजना के तहत पात्र और मानक श्रेणी के उधारकर्ता, SMA-2 खातों को छोड़कर, पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अपने पीक वर्किंग कैपिटल का अधिकतम 20% तक अतिरिक्त फंड हासिल कर सकते हैं। हालांकि इसकी सीमा 100 करोड़ रुपये तय की गई है। इस कर्ज की अवधि पांच साल होगी और शुरुआती एक साल तक मूलधन चुकाने से छूट मिलेगी।
90% तक की सरकारी गारंटी मिलेगी
ECLGS 5.0 के तहत MSME इकाइयों को 100% , गैर-MSME और एयरलाइन कंपनियों को 90% तक सरकारी गारंटी मिलेगी। इससे कंपनियों की उधारी लागत कम होगी। कुल प्रावधान में से 5,000 करोड़ रुपए विशेष रूप से एयरलाइन सेक्टर के लिए आरक्षित किए गए हैं, क्योंकि यह क्षेत्र संघर्ष के असर से ज्यादा प्रभावित माना जा रहा है।
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क्रिसिल के अनुसार, इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ आठ प्रमुख क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। इनमें सिरेमिक, एयरलाइंस, ऑटो कंपोनेंट्स, डायमंड पॉलिशिंग, बासमती चावल निर्यातक और कच्चे तेल पर निर्भर तीन उद्योग शामिल हैं। इन क्षेत्रों पर लागत बढ़ने और सप्लाई बाधित होने का सबसे अधिक असर पड़ा है।
एजेंसी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में कंपनियों की वर्किंग कैपिटल जरूरतें 25% से 30% तक बढ़ सकती हैं। हालांकि उत्पादों की कीमतों में 10% से 15% तक सुधार से बढ़ी हुई लागत का कुछ असर कम हो सकता है, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष का असर गहराने पर बिक्री की मात्रा में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है।
योजना मिडिल ईस्ट वॉर पर करेगी निर्भर
क्रिसिल रेटिंग्स के डिप्टी चीफ रेटिंग्स ऑफिसर मनीष गुप्ता (Manish Gupta) ने कहा कि,
ECLGS 5.0 उनकी रेटेड कंपनियों की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल जरूरतों का करीब एक-तिहाई हिस्सा तुरंत पूरा कर सकता है। बाकी जरूरतें बैंकों द्वारा क्रेडिट लिमिट बढ़ाने से पूरी होने की उम्मीद है। यह योजना कंपनियों को परिचालन प्रभावित किए बिना अस्थायी वित्तीय दबाव से राहत देगी।"
वहीं, क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा (Himank Sharma) का कहना है कि योजना का उपयोग काफी हद तक पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि और तीव्रता पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में कंपनियां इस योजना पर अधिक निर्भर रह सकती हैं, लेकिन लंबी अवधि में मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो ही उनकी वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाए रखेगा।
योजना से कंपनियों को मिली मजबूती
वित्त मंत्रालय के अनुसार, 9 जून 2026 तक ECLGS 5.0 के तहत करीब 1.06 लाख गारंटी जारी की जा चुकी हैं, जिनकी कुल राशि 48,484.26 करोड़ रुपए है। यह आंकड़ा दिखाता है कि योजना को शुरुआती दौर में ही कंपनियों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर इसके प्रभाव पर नजर बनी रहेगी। ऐसे समय में ECLGS 5.0 कंपनियों के लिए एक अहम सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।