देश-विदेश में रोजगार के लिए तैयार होंगे बिहार के छात्र, पॉलिटेक्निक संस्थानों में शुरू होंगे नए कोर्स
बिहार के सभी 46 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में छात्रों के लिए अप्रेंटिसशिप अनिवार्य की गई है। ...और पढ़ें

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
HighLights
सभी 46 पॉलिटेक्निक संस्थानों में अप्रेंटिसशिप अनिवार्य की गई।
छात्रों को देश-विदेश में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
छह माह का अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण डिग्री का अनिवार्य हिस्सा।
दीनानाथ साहनी, पटना। राज्य के सभी 46 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बदलते रोजगार के बाजार के हिसाब से तैयार किया जाएगा।
देश के साथ ही विदेश में भी युवा रोजगार हासिल कर सके इसके लिए विज्ञान, प्रावैधिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग ने पालिटेक्निक संस्थानों में अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम को अनिवार्य करने का निर्देश दिया है।
छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ उद्योग जगत से जोड़कर अप्रेंटिसशिप को प्रोत्साहन दिया जाएगा। हर छात्र के लिए अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम को अनिवार्य किया गया है ताकि युवाओं की पढ़ाई पूरी होते ही रोजगार मिल सके। यह व्यवस्था राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में भी लागू है।
छह माह का अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग आवश्यक
विज्ञान, प्रावैधिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग कहना है कि उद्योगों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। इसी कारण युवाओं को नौकरी और उद्योगों को कर्मचारी नहीं मिल पा रहे हैं। ऑल इंडिया काउंसिल फार टेक्निकल एजुकेशन द्वारा पालिटेक्निक (डिप्लोमा) कोर्स में अप्रेंटिसशिप अनिवार्य किया गया है।
अब छात्र-छात्राओं की डिग्रियों में अप्रेंटिसशिप की मार्किंग को भी शामिल किया गया है। छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के लिए डिप्लोमा के दौरान कम से कम एक सेमेस्टर (छह माह) का अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
इसके तहत छात्र-छात्राओं को अपने पूरे पाठ्यक्रम के दौरान न्यूनतम एक सेमेस्टर या उससे अधिक की अवधि के लिए उद्योगों में अप्रेंटिसशिप करनी है।
44 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में सेंटर आफ एक्सीलेंस का संचालन भी शुरू कर दिया गया है, जो छात्र-छात्राओं को तकनीकी कौशल में ट्रेंड करेगा।
अभी तक 26,710 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। इस साल इलेक्ट्रिकल वाहन बनाने वाली कंपनी जैसे टाटा, महिन्द्रा, हुण्डई आदि के साथ कम से कम एक तकनीकी शिक्षण संस्थान को संबद्ध कर वहां अध्ययनरत छात्रों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब इंवायरमेंट क्लियरेंस का कोर्स भी
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की बैठक में सेंटर आफ एक्सीलेंस की गुणवत्ता और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
सभी पॉलिटेक्निक संस्थान एवं इंजिनियरिंग कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा (एनआईआरएफ) और राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) से मान्यता के लिए आवेदन किया जाएगा।
विकास आयुक्त ने बैठक में इंजीनियरिंग कालेजों में इंवायरमेंट क्लियरेंस का कोर्स कराने, सिविल वर्क के प्रमाणीकरण के लिए क्वालिटी कंट्रोल लैब एवं इंवायरमेंट क्लियरेंस के सर्टिफिकेट की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
इसी तरह पॉलिटेक्निक संस्थानों को आईएसओ प्रमाणीकरण दिलाने के लिए भी पहल की जाएगी। सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में स्पोर्टस क्लब का गठन किया जाएगा। भवन के चहारदीवारी के चारों तरफ वृक्षारोपण भी कराया जाएगा। सभी तकनीकी संस्थानों पर सोलर सिस्टम अधिष्ठापित कराया जाएगा एवं रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी कराया जाएगा।
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ये कोर्स होंगे शुरू
सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में सोलर टेक्निशियन, इलेक्ट्रिकल वाहन, बैट्री मेनटेनेंस कोर्स, शिपिंग कोर्स, रोबोटिक कोर्स।
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