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    बाबा नागार्जुन की बड़ी बहू रेखा मिश्र का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

    Updated: Sat, 20 Jun 2026 12:16 PM (IST)

    Bihar News: प्रख्यात जनकवि बाबा नागार्जुन की बड़ी बहू रेखा मिश्र का 71 वर्ष की आयु में दरभंगा में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थीं और उनके निधन स ...और पढ़ें

    रेखा मिश्र! फाइल फोटो: सौ: स्वजन

    रेखा मिश्र! फाइल फोटो: सौ: स्वजन 

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    डिजिटल डेस्क, दरभंगा। Baba Nagarjun: प्रख्यात साहित्यकार और जनकवि बाबा नागार्जुन के परिवार से जुड़ी दुखद खबर सामने आई है। उनकी बड़ी बहू एवं साहित्यकार शोभाकांत मिश्र की पत्नी रेखा मिश्र का शुक्रवार देर रात निधन हो गया।

    वह 71 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शहर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

    लंबे समय से थीं बीमार

    परिजनों के अनुसार रेखा मिश्र पिछले काफी समय से बीमार थीं। इलाज के दौरान शुक्रवार रात उनका निधन हो गया। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ साहित्य प्रेमियों में भी शोक की लहर दौड़ गई।

    वे अपने पीछे पुत्र, पुत्री, नाती-पोते सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।

    एकमी घाट पर अंतिम संस्कार

    शनिवार को दरभंगा के एकमी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े पुत्र डॉ. कुणाल मिश्रा ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और साहित्य जगत से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।

    लोगों ने जताया शोक

    रेखा मिश्र के निधन पर माले नेता देवेंद्र समेत अनेक सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक हस्तियों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। लोगों ने उनके सरल व्यक्तित्व और परिवार के प्रति समर्पण को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

    जनकवि बाबा नागार्जुन की विरासत

    30 जून 1911 को बिहार के दरभंगा जिले के तरौनी गांव में जन्मे बाबा नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। हिंदी साहित्य में वे 'नागार्जुन' और मैथिली साहित्य में 'यात्री' नाम से प्रसिद्ध हुए। आमजन के जीवन, किसानों, मजदूरों और शोषित वर्ग की पीड़ा को अपनी रचनाओं में स्वर देने के कारण उन्हें 'जनकवि' कहा जाता है।

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    उन्होंने हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं में साहित्य को नई दिशा दी। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, राजनीतिक चेतना और लोकजीवन का जीवंत चित्रण मिलता है।

    मैथिली काव्य संग्रह 'पत्रहीन नग्न गाछ' के लिए उन्हें वर्ष 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कविता के साथ-साथ उन्होंने उपन्यास, निबंध और अन्य विधाओं में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

    बाबा नागार्जुन की प्रमुख रचनाएं

    काव्य संग्रह प्रमुख उपन्यास
    युगधारा बलचनमा
    सतरंगे पंखों वाली रतिनाथ की चाची
    प्यासी पथराई आँखें बाबा बटेसरनाथ
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