150 सालों से मुहर्रम मना रहे हैं बिहार के 16 हिंदू परिवार, मन्नत पूरी होने पर शुरू हुई थी परंपरा
बिहार के धोरैया में हिंदू परिवार डेढ़ सौ वर्षों से मुहर्रम का त्योहार मना रहे हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है। ...और पढ़ें
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धोरैया के तिलौन्धा गांव में हिंदू परिवारों द्वारा गांव में निर्मित मजार। (जागरण)
HighLights
धोरैया में 16 हिंदू परिवार 150 साल से मना रहे मुहर्रम।
तिलौंधा गांव में भगलु जमेदार के वंशज निभा रहे यह परंपरा।
करहरिया गांव में हिंदू कारीगर 100 साल से बना रहे ताजिया।
बोध नारायण तिवारी, धोरैया (बांका)। मुहर्रम के त्योहार को लेकर गांव में तासे की आवाज गूंजने लगी है। मातम के इस त्योहार की शुरुआत शनिवार की शाम केला कट्टी के साथ प्रारंभ हो गया। जिसका पहलाम 26 जून को होगा।
इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग निशान व तजिये के साथ जुलूस निकालकर लाठी डंडे फरसे का खेल दिखाते हुए कर्बला मैदान पहुचकर निशान का पहलाम करते है।
बताया जाता है कि यजीद के साथ हुई लड़ाई में इमामे हुसैन की हत्या कर दी गई थी। उन्ही की यादों में यह त्योहार मातम के रूप में मनाया जाता है।
प्रखंड क्षेत्र के भेलाय पंचायत अंतर्गत तिलौन्धा गांव के 16 घर हिंदू परिवारों द्वारा मुहर्रम का त्योहार करीब डेढ़ सौ वर्षों से मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत गांव के भगलु जमेदार द्वारा की गई थी।
उनके वंशज सोतो चौहान बताते है कि बसतपुर गांव के पीर बाबा स्थान पर उनके पूर्वज खीर आदि पकवान चढ़ाने जाते थे। वही पकवान बनाने के दौरान चूल्हे की आग बुझ जाने पर जब भगलु जमेदार की बहू पंखे की जगह बुझे हुए आग को जलाने के लिए मुह से चूल्हा फूक रही थी तो आग के धड़कने से महिला का चेहरा पूरी तरह जल गया।
जिसे देख स्वजनों ने पीर बाबा से महिला के ठीक होने पर निशान के साथ मुहर्रम मनाने की मन्नतें मांगी। मजार के मोजिर द्वारा द्वारा दिये गए नीर के सेवन और पीर की कृपा से महिला के ठीक हो जाने पर भगलु जमेदार ने गांव में पीर का मजार स्थापित कर सभी परिवारों द्वारा मिलकर मुहर्रम का त्योहार धूमधाम से आज भी मनाया जाता है।
जिसमें मोहन चौहान,गया चौहान,बुललो चौहान,अर्जुन चौहान,गोपाल चौहान सहित सोलह घर परिवार शामिल है। उन्होंने बताया कि पहले निशान लेकर पड़ोस के बाराहाट थाना क्षेत्र अंतर्गत सिदान, कैतका, श्रीपुर मजार मिलान के लिए जाते थे।
लेकिन विवाद के कारण पीपरा गांव भी जाना छोड़ दिया गया। अब गांव में ही निशान घुमाते हुए भेलाय बांध में पहलाम कर दिया जाता है।
करहरिया गांव में हिंदू परिवार द्वारा बनाया जाता मुहर्रम का तजिया
धोरैया में गंगा जमुनी तहजीब का मिशाल वर्षो से कायम है। एक तरफ हिंदू परिवारों द्वारा मुहर्रम का त्योहार मनाया जाता है तो दूसरी ओर झारखंड राज्य के हिंदू परिवार मंटू मालाकार द्वारा करहरिया गांव में तजिया का निर्माण सौ वर्षों से भी अधिक समय से किया जा रहा है।
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गोड्डा जिले के बसंतराय थाना अंतर्गत बिश्वासखानी गांव के रहने वाले कारीगर मंटू ने बताया कि तजिया निर्माण उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी है।
इसकी शुरुआत उनके बाबा सुंदर मालाकार उसके बाद पिताजी विश्वनाथ ने दुर्गा मालाकार के साथ किया। लेकिन उनलोगों के नहीं रहने के बाद 18 वर्षो से उनके द्वारा तजिया बनाया जाता है। तजिया निर्माण कार्य त्योहार से एक सप्ताह पहले किया जाता है जो नवमी की पूरी हो जाती है।