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Ola: ओला इलेक्ट्रिक की बढ़ीं मुश्किलें! ₹40 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की मांग

Mon, 06 Jul 2026 08:05 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता ओला इलेक्ट्रिक एक बार फिर कानूनी चुनौती का सामना कर रही है। कंपनी के दो प्रमुख सप्लायर्स ने कथित बकाया भुगतान को लेकर NCLT में दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कंपनियों का दावा है कि उन्हें 40 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अभी तक नहीं मिला है।
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Bhavish Aggarwal, CEO, Ola - फोटो : Ola

भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric Mobility Ltd.) की ऑपरेटिंग शाखा 'ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' एक बार फिर कानूनी संकट में घिर गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के दो बड़े सप्लायर्स ने 40 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बकाया भुगतान न मिलने पर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) का दरवाजा खटखटाया है। दोनों सप्लायर्स ने ओला के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। आइए इस पूरे विवाद और ओला की मौजूदा स्थिति को विस्तार से समझते हैं:
 

ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ किन कंपनियों ने और क्यों याचिका दायर की है?

यह याचिकाएं ओला इलेक्ट्रिक को ईवी कंपोनेंट्स (पुर्जे) सप्लाई करने वाली दो प्रमुख कंपनियों द्वारा दायर की गई हैं। इन कंपनियों का आरोप है कि ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज ने उन्हें सप्लाई किए गए सामान का भुगतान नहीं किया है। याचिकाकर्ताओं के नाम और उनके डिटेल्स हैं:

  • स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड (Sterling E-Mobility Solutions Ltd.): यह स्टर्लिंग टूल्स लिमिटेड की इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट शाखा है। यह ओला जैसी कंपनियों के लिए ट्रैक्शन मोटर्स, मोटर कंट्रोल यूनिट और डीसी कन्वर्टर्स जैसे महत्वपूर्ण पुर्जे बनाती है।

  • अनेवोल्व मैंडो ई-मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड (Anevolve Mando eMobility Pvt. Ltd.): यह आनंद ग्रुप का एक हिस्सा है। यह कंपनी भी इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्शन मोटर्स, कंट्रोलर्स, इनवर्टर और एसी/डीसी कन्वर्टर्स जैसे बेहद जरूरी पुर्जों की सप्लाई करती है।

 

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Ola Electric - फोटो : X

बकाया रकम का पूरा गणित क्या है और कानून क्या कहता है?

सप्लायर्स और ओला इलेक्ट्रिक के बीच चल रहे इस वित्तीय विवाद से जुड़े मुख्य बिंदुओं की व्याख्या इस तरह है:

  • ₹40 करोड़ से अधिक का कुल बकाया:
    कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज पर स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी का 29.8 करोड़ रुपये और अनेवोल्व मैंडो का 10.8 करोड़ रुपये बकाया है।

  • 45 दिनों से अधिक की देरी:
    रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम पिछले 45 दिनों से अधिक समय से पेंडिंग (बकाया) है। इसी देरी के कारण दोनों सप्लायर्स ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।

  • आईबीसी (IBC) की धारा 9 के तहत कार्रवाई:
    भुगतान न मिलने पर दोनों परिचालन लेनदारों ने दिवालिया और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 की धारा 9 के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए याचिका दायर की है।

  • अदालत में सुनवाई की स्थिति:
    NCLT की बंगलूरू पीठ सोमवार को स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी की याचिका पर सुनवाई करने वाली है। वहीं, अनेवोल्व मैंडो के मामले में पहले ही कई दौर की सुनवाई हो चुकी है और इसकी अगली सुनवाई 27 जुलाई को होनी तय हुई है।

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Bhavish Aggarwal, Ola Electric founder and CMD - फोटो : PTI

इस पूरे मामले पर ओला इलेक्ट्रिक का क्या पक्षा है?

ओला इलेक्ट्रिक चुपचाप बैठने के बजाय इन दावों का अदालत में मजबूती से मुकाबला कर रही है।

  • कैविएट और भुगतान विवाद:
    ओला इलेक्ट्रिक ने दोनों याचिकाओं का विरोध करते हुए ट्रिब्यूनल के समक्ष कैविएट दायर की है।

  • पुर्जों की गुणवत्ता पर सवाल:
    इस विवाद के पीछे केवल पैसों का लेनदेन ही नहीं है, बल्कि यह समझा जा रहा है कि ओला इलेक्ट्रिक ने वेंडर्स द्वारा सप्लाई किए गए कुछ कंपोनेंट्स (पुर्जों) की क्वालिटी (गुणवत्ता) को लेकर भी चिंताएं और आपत्तियां जताई हैं।

  • आधिकारिक चुप्पी:
    इस मामले पर मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों का न तो स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी और अनेवोल्व मैंडो ने कोई जवाब दिया और न ही ओला इलेक्ट्रिक ने प्रकाशन के समय तक कोई टिप्पणी की। आधिकारिक जवाब आने पर समाचार में शामिल किया जाएगा। 

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Ola Electric Scooter Plant - फोटो : Ola Electric

क्या ओला इलेक्ट्रिक पहले भी ऐसे कानूनी संकटों में फंसी है?

यह पहली बार नहीं है जब ओला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। यह कंपनी के लिए एक और नई कानूनी चुनौती है:

  • रोजमर्टा डिजिटल सर्विसेज का पिछला मामला:
    इसी साल की शुरुआत में, वाहन पंजीकरण सेवा प्रदाता (Vehicle Registration Service Provider) रोजमर्टा डिजिटल सर्विसेज लिमिटेड ने भी बकाया भुगतान न करने पर ओला के खिलाफ ऐसी ही दिवालिया याचिका दायर की थी। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ओला ने वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया को इन-हाउस (खुद से) करने का फैसला किया था। हालांकि, बाद में ओला द्वारा बकाया भुगतान चुकाने पर सहमति बनने के बाद यह मामला अदालत के बाहर ही सुलझा लिया गया था।

  • उत्पादन और बिक्री पर असर:
    हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मौजूदा सप्लायर विवाद से ओला इलेक्ट्रिक के प्रोडक्शन (उत्पादन) पर कोई असर पड़ेगा या नहीं। लेकिन पिछले दिनों रजिस्ट्रेशन पार्टनर के साथ हुए विवाद के कारण अस्थाई रूप से ओला के वाहनों की बिक्री प्रभावित जरूर हुई थी।

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Ola Electric Scooter - फोटो : X/@bhash

वित्तीय मोर्चे पर ओला इलेक्ट्रिक का प्रदर्शन कैसा रहा है?

यह कानूनी मुसीबतें ऐसे समय में आई हैं जब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी के लिए वित्त वर्ष 2026 (FY26) का प्रदर्शन काफी दबाव भरा रहा है:

  • राजस्व और बिक्री में भारी गिरावट:
    ओला इलेक्ट्रिक के राजस्व में सालाना आधार पर 50 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह गिरकर 2,253 करोड़ रुपये रह गया। इसके साथ ही वाहनों की बिक्री भी 44 प्रतिशत घटकर 1,73,794 यूनिट्स पर आ गई।

  • घाटे में मामूली सुधार लेकिन रैंकिंग में नुकसान:
    हालांकि कंपनी का शुद्ध घाटा वित्त वर्ष 2025 के 2,276 करोड़ रुपये से घटकर 1,833 करोड़ रुपये रह गया (यानी घाटा थोड़ा कम हुआ)। लेकिन इसके बावजूद वह भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में फिसलकर पांचवें स्थान पर आ गई है। अब वह बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर, एथर एनर्जी और हीरो मोटोकॉर्प से पीछे चल रही है।

भले ही हाल के महीनों में ओला की बिक्री में क्रमिक सुधार देखा गया है। लेकिन ईवी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सालाना आधार पर इसकी ग्रोथ अभी भी भारी दबाव में बनी हुई है। 
 

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