भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric Mobility Ltd.) की ऑपरेटिंग शाखा 'ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' एक बार फिर कानूनी संकट में घिर गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के दो बड़े सप्लायर्स ने 40 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बकाया भुगतान न मिलने पर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) का दरवाजा खटखटाया है। दोनों सप्लायर्स ने ओला के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। आइए इस पूरे विवाद और ओला की मौजूदा स्थिति को विस्तार से समझते हैं:
ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ किन कंपनियों ने और क्यों याचिका दायर की है?
यह याचिकाएं ओला इलेक्ट्रिक को ईवी कंपोनेंट्स (पुर्जे) सप्लाई करने वाली दो प्रमुख कंपनियों द्वारा दायर की गई हैं। इन कंपनियों का आरोप है कि ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज ने उन्हें सप्लाई किए गए सामान का भुगतान नहीं किया है। याचिकाकर्ताओं के नाम और उनके डिटेल्स हैं:
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स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड (Sterling E-Mobility Solutions Ltd.): यह स्टर्लिंग टूल्स लिमिटेड की इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट शाखा है। यह ओला जैसी कंपनियों के लिए ट्रैक्शन मोटर्स, मोटर कंट्रोल यूनिट और डीसी कन्वर्टर्स जैसे महत्वपूर्ण पुर्जे बनाती है।
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अनेवोल्व मैंडो ई-मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड (Anevolve Mando eMobility Pvt. Ltd.): यह आनंद ग्रुप का एक हिस्सा है। यह कंपनी भी इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्शन मोटर्स, कंट्रोलर्स, इनवर्टर और एसी/डीसी कन्वर्टर्स जैसे बेहद जरूरी पुर्जों की सप्लाई करती है।