वहीं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-गांधीनगर का एक अध्ययन में सामने आया है कि सन 2100 में भारत में भीषण हीट वेव में 30 गुना की आश्चर्यजनक वृद्धि देखी जा सकती है। इसमें अधिकतम तापमान से अधिक होने पर 'रेड अलर्ट' शुरू हो जाएगा। सामान्य तापमान कम से कम 6 डिग्री सेल्सियस पर ऑरेंज अलर्ट होगा और अधिकतम तापमान चार से पांच डिग्री सेल्सियस होने पर जारी किया जाएगा। इसमें सामान्य से ऊपर, जबकि प्रस्थान के लिए 'येलो अलर्ट' दिया जाएगा।
तीन चरणों में लागू होगा हीट वेव प्लान
हीट वेव योजना तीन चरणों में लागू की जाएगी। इसमें चरण एक में (पूर्व-गर्मी का मौसम में फरवरी और मार्च) में लागू होगा। इसमें चेतावनी प्रणाली और अलर्ट जारी करने के लिए एक संचार योजना लागू होगी। जिसमें स्वास्थ्यकर्मी और स्वैच्छिक समूह शामिल होंगे। इनके लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दूसरे चरण में कोल्ड केंद्रों का निर्माण किया जाएगा। इसमें मंदिरों, सार्वजनिक इमारतों, मॉल और अस्थायी रैन बसेरों को सक्रिय किया जाएगा। वहीं, बाहरी श्रमिकों, स्लम समुदायों और अन्य कमजोर लोगों में पानी की कमी न हो इसके लिए पर्याप्त रूप से पानी की व्यवस्था की जाएगी।
आधिकारिक अनुमान के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में खपत के लिए लगभग 1,300 एमजीडी पानी की आवश्यकता है। लेकिन, दिल्ली जल बोर्ड केवल 1 हजार के आसपास ही आपूर्ति कर सकता है। जिससे कई क्षेत्र पानी की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में निर्माण स्थलों, बस स्टॉप और अन्य स्थानों पर ओआरएस की व्यवस्था की जाएगी व पानी के टैंकर से पानी पहुंचा जाएगा। तीसरा चरण जुलाई-सितंबर अवधि में लागू किया जाएगा। इसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और वृक्षों में शीतल विश्राम केंद्र स्थापित किए जाएंगे। गर्मी वाले क्षेत्रों में पौधारोपण किया जाएगा। ग्रीनपीस इंडिया के अभियान प्रबंधक अविनाश कुमार चंचल ने कहा कि यह देखकर खुशी हुई कि आखिरकार दिल्ली को हीटवेव कार्ययोजना मिल गई है जिसका लंबा इंतजार था।