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बिहार में हर दिन तस्करों से छुड़ाया जाता है एक बच्चा,  राजस्थान पहले और पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आसिम खान Updated Mon, 09 Dec 2019 02:21 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
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देश में बच्चों की तस्करी रोकने के लिए तमाम राज्यों की सरकारें हर संभव प्रयास कर रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में हर दिन एक बच्चे को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाया जाता है। 2017 में राज्य में 395 बच्चे तस्करों से मुक्त कराए गए।

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एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि राजस्थान और पश्चिम बंगाल के बाद बिहार तीसरे स्थान पर रहा, जहां 2017 में सर्वाधिक 395 बच्चों को मानव तस्करों से बचाया गया। इनमें 362 लड़के और 33 लड़कियां थीं, जिनकी उम्र 18 साल से कम थी। 395 में 362 बच्चों को जबरन मजदूरी के धंधे में धकेल दिया गया था। 

रिपोर्ट के अनुसार, बिहार पुलिस ने 2017 में तस्करों के खिलाफ 121 मामले दर्ज किए, लेकिन एक भी केस में वह चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। वहीं, राजस्थान में बच्चों की तस्करी के सर्वाधिक 886 मामले दर्ज किए गए। जबकि पश्चिम बंगाल में ऐसे 450 मामले सामने आए।
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एनसीआरबी हर साल अपराध से जुड़े आंकड़े जारी करता है, लेकिन इस बार यह लगभग दो साल पर जारी हुआ है। बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) विनय कुमार ने बताया कि बच्चों की तस्करी की दो मुख्य वजहें गरीबी और अशिक्षा है। मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए गरीब परिवारों के बच्चों के पुनर्वास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि उनका जीवन बेहतर बनाया जा सके।

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